Seva Teerth Complex: ‘सेवा तीर्थ’ परिसर PMO का नया ठिकाना.. आजादी का बाद आज पहली बार शिफ्ट होगा PM आवास, दफ्तर और सचिवालय..

Seva Teerth Complex in Hindi: 1931 में उद्घाटन किए गए सेंट्रल विस्टा में राष्ट्रपति भवन, उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक, नया संसद भवन, राष्ट्रीय अभिलेखागार, इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के किनारे स्थित नागरिक उद्यान शामिल थे। सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास का उद्देश्य नई दिल्ली में प्रशासनिक दक्षता, स्थिरता और सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाना है।

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  • Publish Date - January 14, 2026 / 07:29 AM IST,
    Updated On - January 14, 2026 / 08:43 AM IST

Seva Teerth Complex in Hindi || Image- The secretariat FILE

HIGHLIGHTS
  • पहली बार पीएमओ बदलेगा अपना स्थान
  • सेवा तीर्थ में होगा पीएमओ का संचालन
  • सत्ता से सेवा की ओर शासन की सोच

नई दिल्ली: आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को उसके पुराने स्थान से शिफ्ट किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय आज से नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में काम करेगा। (Seva Teerth Complex in Hindi) इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय भी कार्य करेगा।

1,189 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ भवन

1,189 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ भवन कार्यपालिका परिसर-1 में वायु भवन के पास स्थित है। प्रधानमंत्री कार्यालय के यहां शिफ्ट होने के बाद ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक खाली हो जाएंगे। सरकार की योजना के अनुसार इन दोनों इमारतों को सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा, जिसका नाम ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ रखा गया है।

गौरतलब है कि पुराने निर्णयों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। इसे पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहा जाता था। प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा इस निर्माणाधीन परिसर में मंत्रिमंडल सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और ‘इंडिया हाउस’ के कार्यालय भी शामिल होंगे। ‘इंडिया हाउस’ आने वाले गणमान्य अतिथियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ताओं का प्रमुख स्थल होगा।

अधिकारियों के अनुसार ‘सेवा तीर्थ’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सेवा की भावना को प्रतिबिंबित करे और जहां राष्ट्रीय प्राथमिकताएं साकार हों। (Seva Teerth Complex in Hindi) उन्होंने बताया कि भारत के सार्वजनिक संस्थान एक शांत लेकिन गहन बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। शासन की सोच ‘सत्ता’ से ‘सेवा’ और अधिकार से उत्तरदायित्व की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक भी है।

बदले गये इन भवनों के नाम

इसी क्रम में राज्यों के राज्यपालों के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन से जुड़े क्षेत्रों को कर्तव्य और पारदर्शिता की भावना के अनुरूप नया स्वरूप दिया गया है। उनका कहना है कि हर नाम, हर इमारत और हर प्रतीक इस विचार को दर्शाता है कि सरकार सेवा के लिए है।

सरकार ने पहले राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के वृक्षों से घिरे मार्ग का नाम ‘राजपथ’ से बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया था। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का नाम भी 2016 में बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ कर दिया गया था, जो विशिष्टता के बजाय कल्याण की भावना को दर्शाता है।

इसके अलावा केन्द्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखा गया है, जिसे एक विशाल प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार ये सभी बदलाव एक गहरे वैचारिक परिवर्तन के प्रतीक हैं, जहां भारतीय लोकतंत्र सत्ता की बजाय जिम्मेदारी और पद की बजाय सेवा को प्राथमिकता दे रहा है। (Seva Teerth Complex in Hindi) उनका कहना है कि नामों में बदलाव के साथ-साथ शासन की मानसिकता भी बदल रही है और आज शासन सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम व्यवस्था की भाषा बोल रहा है।

क्या हैं ‘सेवा तीर्थ परिसर’?

पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्री ने सेंट्रल विस्टा परिसर में मौजूद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को “सेवा तीर्थ” बताते हुए इसे भारत के प्रशासनिक विकास में एक मील का पत्थर बताया था।

राजनीतिक दर्शन में सेवा- यह शब्द सेवा पर आधारित नागरिक-केंद्रित शासन की ओर एक बदलाव का संकेतक है। इसे भारतीय राजनीतिक दर्शन में सेवा के व्यापक लोकाचार के रूप में देखा जा रहा है।

तीर्थ शब्द का व्यापक दृष्टिकोण- ‘तीर्थ’ शब्द, जो परंपरागत रूप से तीर्थ स्थलों को दर्शाता है, सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि सेवा के रूप में देखने के गांधीवादी आदर्श को पुष्ट करता है। (Seva Teerth Complex in Hindi) यह इस दृष्टिकोण को पुष्ट करता है कि प्रशासनिक क्षेत्र नागरिक-केंद्रित होने चाहिए, न कि अलग-थलग नौकरशाही वाले क्षेत्र।

प्रतीकात्मक शासन- “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के सिद्धांत को प्रतिध्वनित करता है। प्रधानमंत्री कार्यालयको जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिक उत्तरदायित्व के स्थान के रूप में प्रस्तुत करता है।

सेंट्रल विस्टा परियोजना- पुनर्निर्मित पीएमओ व्यापक सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है।

1931 में उद्घाटन किए गए सेंट्रल विस्टा में राष्ट्रपति भवन, उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक, नया संसद भवन, राष्ट्रीय अभिलेखागार, इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के किनारे स्थित नागरिक उद्यान शामिल थे। सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास का उद्देश्य नई दिल्ली में प्रशासनिक दक्षता, स्थिरता और सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाना है।

इन्हें ही पढ़ें:-

Q1. सेवा तीर्थ परिसर क्या है?

उत्तर: सेवा तीर्थ नया पीएमओ परिसर है, जो नागरिक-केंद्रित और सेवा आधारित शासन का प्रतीक है

Q2. पीएमओ को साउथ ब्लॉक से क्यों शिफ्ट किया गया?

उत्तर: प्रशासनिक दक्षता, आधुनिक ढांचा और सेवा-आधारित शासन को बढ़ावा देने के लिए शिफ्ट किया गया

Q3. साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का अब क्या होगा?

उत्तर: दोनों ऐतिहासिक इमारतों को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा