नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उनकी मां ने पारिवारिक न्यास को “अमान्य” घोषित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने पक्षों को मध्यस्थता के विकल्प तलाशने का सुझाव दिया।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने 80-वर्षीय रानी कपूर द्वारा दायर याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित न्यास “जाली, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी वाले” दस्तावेजों का परिणाम था।
संपत्ति और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर कानूनी कार्यवाही दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है और शीर्ष अदालत में दायर याचिका में न्यास की सभी संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने सोना ग्रुप फैमिली न्यास को लेकर विवाद में शामिल पक्षों से मध्यस्थता का विकल्प तलाशने को कहा।
पीठ ने कपूर की तरफ से पेश हुए वकील से कहा, “आप सब क्यों लड़ रहे हैं? यह आपके मुवक्किल के लड़ने की उम्र नहीं है।”
उसने कहा, “एक बार मध्यस्थता का रास्ता अपना लें। वरना यह सब व्यर्थ होगा। आपकी उम्र 80 साल है। यह आपके मुवक्किल के लिए लड़ने की उम्र नहीं है।”
न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के लिए सात मई की तारीख तय की है।
भाषा प्रशांत सुरेश
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