न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

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न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 04:33 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 04:33 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

याचिका में इन प्रावधानों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि ये महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर भेदभावपूर्ण हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ताओं पौलोमी पाविनी शुक्ला और न्याय नारी फाउंडेशन की ओर से मामले में पेश हुए वकील प्रशांत भूषण द्वारा दी गई दलीलों पर गौर किया और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी किया।

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान शरीयत उत्तराधिकार नियम महिलाओं के खिलाफ ‘‘स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण’’ हैं।

भूषण ने कहा कि 1937 का अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े मामले दीवानी प्रकृति के होते हैं और ये अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित ‘‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’’ नहीं हैं।

वकील ने कहा, ‘‘यह कहना कि महिलाओं को पुरुष समकक्षों की तुलना में आधा या उससे भी कम मिलेगा, भेदभावपूर्ण है।’’

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश