शबरिमला में नहीं है कोई समस्या; अधिक श्रद्धालुओं के कारण अरवण की कमी हुई: टीडीबी अध्यक्ष

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शबरिमला में नहीं है कोई समस्या; अधिक श्रद्धालुओं के कारण अरवण की कमी हुई: टीडीबी अध्यक्ष

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 04:10 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 04:10 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 22 सितंबर (भाषा) त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष के. जयकुमार ने शनिवार को शबरिमला में कोई बड़ी समस्या होने के केरल सरकार के बयान से असहमति जताते हुए कहा कि ‘अरवण पायसम’ की कमी इसलिए हुई क्योंकि भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन के लिए उम्मीद से ज़्यादा श्रद्धालु आ गए थे।

टीडीबी अध्यक्ष ने कहा कि योजना इसलिए ‘गड़बड़’ हो गई क्योंकि भक्तों की संख्या उम्मीद से ज़्यादा हो गई थी।

जयकुमार ने एक टीवी चैनल से कहा, ‘‘सोमवार को मंदिर बंद होने के साथ ही यह समस्या खत्म हो गई। दो दिनों तक कमी रही क्योंकि हमें 30,000 भक्तों के आने की उम्मीद थी, लेकिन करीब 50,000 भक्त आ गए। इस वजह से हमारी योजना गड़बड़ा गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अरवण को जल्दी तैयार करने का कोई साधन नहीं था क्योंकि तीर्थयात्रा के मौसम से पहले उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए संयंत्र की मरम्मत चल रही है। हमें इसकी उत्पादन क्षमता को मौजूदा 2.5 लाख टिन से बढ़ाकर 3.5 लाख टिन करना होगा।’’

उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम आधा हो चुका है और 10 अक्टूबर तक यह पूरा हो जाएगा।

इस मामले पर राज्य के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि मरम्मत के लिए संयंत्र बंद करने से पहले बोर्ड को ‘अरवण’ का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना चाहिए था।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘ मैं यह नहीं कह रहा कि मरम्मत का काम नहीं होना चाहिए। लेकिन जरूरी भंडार बनाए रखा जाना चाहिए था। उन्हें तीर्थयात्रा के मौसम से पहले ज़्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए भी योजना बनानी चाहिए थी, ताकि उस समय भीड़ से बचा जा सके। सही योजना न होने के कारण, कई श्रद्धालुओं को ‘अरवण’ (प्रसाद) के बिना ही लौटना पड़ा और इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है।’’

उन्होंने पत्रकारों से कहा था, ‘‘इसलिए, सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती। मंदिर में पहले भी कुछ दिक्कतें रही हैं। पिछले कई दिनों से इस धर्म स्थल के बारे में कोई अच्छी खबर नहीं आ रही है, इसलिए हमें चिंता है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार का बोर्ड के रोज़मर्रा के कामकाज या उनके अधिकारों में दखल देने या उसे भंग करने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि यह एक कानूनी संस्था है।

मंत्री ने कहा कि लेकिन यह भी एक तथ्य है कि सरकार को दूसरे बोर्ड के साथ कोई समस्या नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘अगर तीर्थयात्रा सीजन का ठीक से इंतजाम नहीं किया गया, तो सरकार किसी भी हद तक जा सकती है।’’

इससे पहले दिन में टीडीबी अध्यक्ष ने भी कहा कि 17 नवंबर से शुरू होने वाले मंडलकला-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सीज़न की तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं और उन्हें इस संबंध में कोई समस्या नहीं दिख रही है।

उन्होंने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि तीर्थयात्रा के मौसम की तैयारियां धीमी पड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्य के देवस्वोम मंत्री मुरलीधरन की टिप्पणियों का जवाब नहीं देना चाहते।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश