पश्चिम बंगाल में एसआईआर संबंधी तनाव के कारण रोजाना तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं: ममता

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पश्चिम बंगाल में एसआईआर संबंधी तनाव के कारण रोजाना तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं: ममता

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 05:08 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 05:08 PM IST

(फोटो के साथ)

कोलकाता, 23 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद को लेकर फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं।

सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में कोलकाता में रेड रोड पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक 110 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग एसआईआर की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। अस्पतालों में 40 से 45 और लोग जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं। इतने साल बाद क्या हमें यह साबित करना होगा कि हम इस देश के नागरिक हैं?’’

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूची की एसआईआर कवायद जारी है।

बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया और कहा कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बी आर आंबेडकर जैसी महान हस्तियों का अपमान किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हम देख रहे हैं कि भारत के इतिहास को विकृत करने के प्रयास किए जा रहे हैं… अपमान, असहिष्णुता, उस इतिहास के प्रति कृतघ्नता जताई जा रही है तथा भाषा का अपमान किया जा रहा है; ये सब आज हमारे सामने है।’’

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर ‘‘सुभाष चंद्र बोस द्वारा परिकल्पित’’ योजना आयोग को समाप्त करने और उसके स्थान पर नीति आयोग की स्थापना करने का आरोप लगाया।

बनर्जी ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बोस की जयंती पर अब तक राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि देश के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के सपने ‘‘तार-तार’’ किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा ब्रिगेड द्वारा गढ़ा गया इतिहास संस्करण लोगों पर थोपा जा रहा है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘इसका देश के इतिहास से कोई संबंध नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।’’ मुख्यमंत्री ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि अगर बोस जीवित होते तो क्या उन्हें तार्किक विसंगति के नाम पर एसआईआर सुनवाई के लिए बुलाया जाता और ‘‘उनकी भारतीय नागरिकता के बारे में पूछताछ की जाती’’।

उन्होंने दावा किया कि तार्किक विसंगति को लेकर निर्वाचन आयोग ने एसआईआर सुनवाई के लिए 1.38 करोड़ लोगों को तलब किया है और मसौदा मतदाता सूची से पहले ही 58 लाख नाम हटाए जा चुके हैं। ख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, ‘‘कुल संख्या दो करोड़ है।’’

बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता चुनाव से पहले अपने भाषणों के दौरान बांग्ला भाषा में कुछ शब्द बोलने के लिए ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ का इस्तेमाल करते हैं और ऐसा करके ‘‘बंगाल के बुद्धिजीवियों का अपमान करते हैं’’।

उन्होंने उल्लेख किया कि बांग्ला भाषी लोग अपने उपनामों की वर्तनी अलग-अलग तरीकों से लिखते हैं।

बनर्जी ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके उपनाम की वर्तनी बनर्जी और बंदोपाध्याय दोनों तरह से लिखी जाती है। उन्होंने कहा कि ‘‘एसआईआर कवायद करने वालों को यह बात क्यों नहीं पता है’’।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह की विसंगतियों के कारण 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किया गया है।’’

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि बुजुर्ग लोगों को एसआईआर की सुनवाई के लिए बुलाया गया और सवाल उठाया कि इस संबंध में प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को नोटिस क्यों भेजा गया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अब वे (भाजपा) तय करेंगे कि बच्चे पैदा होंगे या नहीं; वे पहले से ही यह तय कर रहे हैं कि लोग क्या खाएंगे और क्या नहीं खाएंगे।’’

बनर्जी ने कहा कि आज ‘मानवता’ को ‘अमानवता’ के खिलाफ लड़ना पड़ रहा है। उन्होंने महाभारत में अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष के साथ तुलना करते हुए कहा, ‘‘हम कौरवों के खिलाफ लड़ रहे हैं’’।

बोस के प्रसिद्ध नारे ‘दिल्ली चलो’ का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि मानवता को फिर से स्थापित करने के लिए इस नारे को एक बार फिर बुलंद किया जाना चाहिए।

भाषा सुरभि नेत्रपाल

नेत्रपाल