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नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि भारत और लाओ पीडीआर के बीच व्यापार एवं निवेश में प्रगति करने की अपार संभावनाएं हैं।
राष्ट्रपति भवन में लाओ पीडीआर के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत और लाओ पीडीआर के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह जुड़ाव दोनों देशों की बौद्ध धर्म और रामायण की साझा विरासत में स्पष्ट रूप से झलकता है।
उन्होंने कहा कि भारत और लाओ पीडीआर के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हुई है, लेकिन व्यापार और निवेश दोनों क्षेत्रों में प्रगति करने की अब भी काफी गुंजाइश है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, औषधि, कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली जैसे क्षेत्रों में लाओ पीडीआर के साथ सहयोग का विस्तार करने में प्रसन्नता महसूस करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हम नवाचार और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में भी अपने अनुभव साझा करने के इच्छुक हैं।’’
थोंगसावन फोमविहाने की पहली भारत यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी लाओस के युवाओं की आकांक्षाओं और वहां की सामाजिक-आर्थिक विकास की जरूरतों के अनुरूप है।
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और लाओ पीडीआर के बीच घनिष्ठ सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी हो सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष, ‘‘हम दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं’’, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आसियान से संबंधित शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए लाओ पीडीआर की यात्रा की, जिस दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिससे द्विपक्षीय सहयोग को नयी गति मिली।
भाषा नेत्रपाल माधव
माधव