नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) राज्यसभा की तृणमूल कांग्रेस सदस्य मेनका गुरुस्वामी ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार संसद में भाषण को ‘सेंसर’ कर रही है और जब विपक्ष के सांसद ऐसे मुद्दे उठाते हैं जिन पर सत्ता पक्ष चर्चा नहीं चाहता, तो उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं।
उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार विपक्ष को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने, न्यायाधीशों की नियुक्ति और सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों से जुड़े मुद्दे उठाने से रोककर ‘‘संसदीय लोकतंत्र को खत्म’’ कर रही है।
तृणमूल सदस्य ने कहा, ‘‘आज सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि उन्होंने संसदीय लोकतंत्र के साथ क्या किया है। सरकार और स्पीकर भाषण सेंसर करते हैं। हम मुद्दे उठाते रहे हैं… हम चाहते हैं कि गृह मंत्री सदन में आएं।’’
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के प्रावधान वाले विधेयक पर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।
वरिष्ठ वकील गुरुस्वामी ने कहा, ‘‘… मैंने इस बारे में बात की कि आप अनुसूचित जाति के न्यायाधीशों को नियुक्त नहीं करते, अनुसूचित जनजाति के न्यायाधीशों को नियुक्त नहीं करते, महिलाओं को नियुक्त नहीं करते, समलैंगिक लोगों को नियुक्त नहीं करते, आप केवल उन्हीं लोगों को नियुक्त करते हैं जो आपकी विचारधारा को मानते हैं। आप धार्मिक अल्पसंख्यकों को भी नियुक्त नहीं करते।’’
‘‘सेंसरशिप’’ का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘तुरंत आपका माइक बंद कर दिया जाता है। यह विषय पर बात न करना कैसे हुआ? विधेयक न्यायपालिका से जुड़ा है। मैं न्यायपालिका के भीतर के मुद्दों के बारे में बात कर रही हूं। हम चाहते हैं कि न्यायपालिका में सबसे अच्छे और काबिल लोग हों। इसमें इस देश की विविधता भी शामिल है।’’
भाषा अविनाश नरेश
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