त्रिपुरा सरकार ने रथयात्रा के रथों की ऊंचाई पांच मीटर तक सीमित की

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त्रिपुरा सरकार ने रथयात्रा के रथों की ऊंचाई पांच मीटर तक सीमित की

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 03:27 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 03:27 PM IST

अगरतला, 15 जुलाई (भाषा) त्रिपुरा सरकार ने 2023 में कुमारघाट में करंट लगने के हादसे के बाद सुरक्षा उपाय कड़े करते हुए राज्यभर में आयोजित होने वाली रथयात्राओं के आयोजकों को निर्देश दिया है कि भगवान जगन्नाथ के लिए लकड़ी के ऐसे रथ तैयार किए जाएं जिनकी ऊंचाई पांच मीटर से अधिक न हो। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, सिपाहीजाला जिले के मेलाघर में आयोजित होने वाली रथयात्रा को इस नियम से छूट दी गई है। अधिकारियों द्वारा जोखिम का आकलन किए जाने के बाद वहां लगभग सात मीटर ऊंचे रथ की अनुमति दी गई है।

ये सुरक्षा दिशा-निर्देश 28 जून, 2023 को उनाकोटी जिले के कुमारघाट में हुई उस दुर्घटना के बाद जारी किए गए हैं जिसमें रथ, ऊपर से गुजर रहे हाई-वोल्टेज बिजली के तार की चपेट में आ गया था और उसमें आग लग गई थी। इस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने बृहस्पतिवार को प्रस्तावित रथयात्रा की तैयारियों को लेकर धार्मिक संगठनों के साथ बैठक की। आयोजकों से कहा गया है कि भगवान जगन्नाथ का रथ लकड़ी का बनाया जाए और उसकी ऊंचाई पांच मीटर से अधिक न हो।’’

उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं को रथ पर चढ़ने से रोकने के लिए धार्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों को रथ के चारों ओर तैनात किया जाएगा। इसके अलावा भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी, अग्निशमन विभाग की टीमें तथा एम्बुलेंस भी तैनात रहेंगी।

सिपाहीजाला के जिला मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ एस. जायसवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘ मेलाघर में रथयात्रा के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ ऐसी सामग्री से बनाया जाएगा जो बिजली के संपर्क में आने पर करंट प्रवाहित नहीं करेगी। इसकी ऊंचाई लगभग सात मीटर होगी। उपमंडलीय समिति ने जोखिम का आकलन करने के बाद आयोजकों को बृहस्पतिवार को रथयात्रा निकालने की अनुमति दी है। अन्य स्थानों के विपरीत यहां यह शोभायात्रा खुले मैदान में निकाली जाएगी।’’

भाषा शोभना पवनेश

पवनेश