नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) हाल में हुए विधानसभा चुनावों में भारी मतदान के बावजूद, यह 2013 के त्रिपुरा चुनाव में दर्ज 93 प्रतिशत से अधिक मतदान के रिकॉर्ड से ऊपर नहीं जा सका। निर्वाचन आयोग के आकड़ों से यह स्पष्ट होता है।
त्रिपुरा, नगालैंड और मणिपुर में विधानसभा चुनावों में वर्षों से 90 प्रतिशत और इससे अधिक मतदान होता आ रहा है। अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में 92.67 प्रतिशत मतदान के साथ पश्चिम बंगाल ने नगालैंड और मणिपुर को पीछे छोड़ दिया, जो स्वतंत्रता के बाद से राज्य का सबसे अधिक मतदान है।
पश्चिम बंगाल में इससे पहले सर्वाधिक मतदान 84.72 प्रतिशत 2013 के चुनाव में दर्ज किया गया था।
त्रिपुरा में 2013 के चुनाव में 93.61 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो किसी भी राज्य में अब तक का सर्वाधिक मतदान है, तथा यह राज्य अब भी इस मामले में अग्रणी बना हुआ है।
गत 9 अप्रैल को असम और पुडुचेरी में क्रमशः 85.38 प्रतिशत और 89.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जिससे इन दोनों जगह अब तक की सबसे अधिक चुनावी भागीदारी का रिकॉर्ड टूट गया।
तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2011 में हुए 78.29 प्रतिशत के पिछले उच्चतम मतदान से अधिक है।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92.69 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 90.92 रहा।
भाषा नेत्रपाल नरेश
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