टीटीडी मिलावटी घी मामला : ईडी ने डेरी कंपनियों और उसके निदेशकों के ठिकानों पर छापेमारी की

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टीटीडी मिलावटी घी मामला : ईडी ने डेरी कंपनियों और उसके निदेशकों के ठिकानों पर छापेमारी की

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 08:51 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 08:51 PM IST

हैदराबाद, तीन जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी)को कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति करने से जुड़े मामले में देहरादून, दिल्ली, तमिलनाडु के डिंडीगुल, आंध्र प्रदेश के गुंटूर और मुंबई सहित 15 स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की।

केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक डिंडीगुल स्थित ए आर डेरी फूड प्राइवेट लिमिटेड, अहिल्यानगर स्थित मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और रुड़की स्थित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के आवासीय और कार्यालय परिसरों सहित विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई।

ईडी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान 60 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। इस दौरान अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) के निवेश से अर्जित 45 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों का भी खुलासा हुआ, साथ ही आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज कई अचल संपत्तियों का विवरण भी प्राप्त हुआ।

ईडी ने ए आर डेरी फूड और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथिमिकी के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की।

एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कुछ अधिकारियों के साथ साठगांठ कर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी की और मिलावटी घी की आपूर्ति करके मंदिर को अनुचित रूप से नुकसान पहुंचाया।

अब तक की गई जांच के मुताबिक टीटीडी को मिलावटी घी की आपूर्ति करने से प्राप्त धनराशि को बाद में आपस में जुड़ी कानूनी संस्थाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के एक जटिल जाल के जरिये अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था ताकि धन के अवैध स्रोत को छिपाया जा सके।

इस साल की शुरुआत में, मामले की जांच करने वाली एसआईटी ने नेल्लोर की अपराध निवारण ब्यूरो अदालत में अंतिम आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें घी में मिलावट के मामले में नौ टीटीडी अधिकारियों, पांच डेरी विशेषज्ञों और अन्य सहित 36 लोगों को आरोपी बनाया गया।

एसआईटी ने अपने आरोप पत्र में कहा कि जांच में खुलासा हुआ कि अप्रैल 2019 के दौरान, टीटीडी के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी की मंजूरी से, अधिकारियों और बाहरी डरी विशेषज्ञों सहित एक समिति का गठन किया गया था, ताकि घी निविदाओं में कुछ शर्तों को संशोधित और जोड़ा जा सके।

आरोप पत्र के मुताबिक घी खरीद निविदा प्रक्रिया में कुछ शर्तों में ढील देने से उन डेरी को भी हिस्सा लेने का मौका मिल गया जिन्होंने दूध की खरीद नहीं की थी और साथ ही उन नई स्थापित डेरियों को भी जिनके पास आवश्यक अनुभव और प्रतिष्ठा नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप, अंततः टीटीडी द्वारा लड्डू प्रसाद बनाने के लिए खरीदे गए घी की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

भाषा धीरज माधव

माधव