नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) तपेदिक के खिलाफ लड़ाई में पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा के साक्ष्य-आधारित एकीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इस बीमारी के लिए सहायक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेदिक उपचार पर एक क्लिनिकल अध्ययन करने हेतु जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के साथ सहयोग किया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ साझेदारी में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) अध्ययन के जरिये तपेदिक के लिए एक आयुर्वेदिक उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन करेगी।
यह उपचार, पोषण सहायता के साथ-साथ मानक ‘तपेदिक रोधी उपचार’ (एटीटी) के पूरक के रूप में काम करेगा।
एम्स, जेआईपीएमईआर और एनईआईजीआरआईएचएमएस जैसे प्रमुख संस्थानों में किए जाने वाले इस 24 महीने के अध्ययन का उद्देश्य, तपेदिक (टीबी) के मरीजों में पोषण संबंधी परिणामों को बेहतर बनाने, ठीक होने की गति को तेज करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के संबंध में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जुटाना है।
यह सहयोगात्मक क्लिनिकल अध्ययन आयुष मंत्रालय और डीबीटी की एक संयुक्त पहल है, जिसकी नींव मई 2022 में हस्ताक्षरित उस समझौता ज्ञापन में निहित है, जिसका उद्देश्य एकीकृत और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने पिछले सप्ताह संयुक्त रूप से यह घोषणा की थी।
भाषा
शफीक अविनाश
अविनाश