यूसीसी से आदिवासियों की पहचान खत्म हो जाएगी: कांग्रेस

Ads

यूसीसी से आदिवासियों की पहचान खत्म हो जाएगी: कांग्रेस

  •  
  • Publish Date - May 26, 2026 / 10:04 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 10:04 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर बुलडोजर चलाने का आरोप लगाया और दावा किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एवं ‘डीलिस्टिंग’ से आदिवासियों की पहचान खत्म हो जाएगी।

कांग्रेस के आदिवासी विभाग के प्रमुख विक्रांत भूरिया ने बीते 24 मई को यहां गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा को आदिवासियों से नहीं, बल्कि कॉरर्पोरेट से लगाव है।

आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘जनजातीय सुरक्षा मंच’ द्वारा लाल किला मैदान में ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें शाह ने कहा था कि आदिवासियों पर यूसीसी का कोई असर नहीं होगा।

भूरिया ने संवाददाताओं से बातचीत में यूसीसी और डीलिस्टिंग को आदिवासियों की पहचान और अधिकारों पर बड़ा हमला बताया और कहा कि इनसे उनकी पहचान खत्म हो जाएगी।

‘डीलिस्टिंग’ शब्द का उपयोग आदिवासी समुदायों के आरक्षण और अधिकारों से जुड़े सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन के लिए भी किया जाता है। इसके तहत यह मांग की जाती है कि जिन आदिवासियों ने धर्मांतरण कर लिया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर कर दिया जाए।

भूरिया ने दावा किया, ‘‘भाजपा आदिवासियों को बांटना चाहती है, जिससे उनकी संख्या कम हो जाए और फिर उनका आरक्षण घटा दिया जाए। इसके बाद आदिवासी विधानसभा और लोकसभा सीटों को कम कर दिया जाएगा। जैसे ही पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासियों के लिए आरक्षित क्षेत्र घट जाएंगे तो जंगलों को सुरक्षित रखने वाले नियम भी खत्म कर दिए जाएंगे और फिर पूंजीपति घराने आदिवासियों की जमीन के नीचे छिपी खनिज संपदा को आसानी से लूट सकेंगे।’’

उन्होंने दिल्ली में चल रही ‘हाउसिंग लिस्टिंग’ का जिक्र करते हुए दावा किया कि सरकारी कर्मचारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे आदिवासियों के नाम एसटी कॉलम में दर्ज न करके अन्य वाले विकल्प में भरे जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के लोग ‘आदिवासी’ को ‘वनवासी’ मानते हैं। आदिवासी और वनवासी में बहुत बड़ा फर्क है। आदिवासी वो हैं जो आदिकाल से इस धरती पर रह रहे हैं और इस धरती के मालिक हैं। वनवासी वो हैं, जो सिर्फ वनों तक सीमित हैं, जो जंगल में रहते हैं।’’

भूरिया ने कहा, ‘‘आदिवासी एक शब्द नहीं, इतिहास है, वनवासी एक राजनीतिक प्रोजेक्ट है।’’

भाषा हक हक पवनेश

पवनेश