दोहरी सत्ता संरचना वाला केंद्र शासित प्रदेश ‘शासन का सबसे खराब रूप’ है : उमर अब्दुल्ला

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दोहरी सत्ता संरचना वाला केंद्र शासित प्रदेश ‘शासन का सबसे खराब रूप’ है : उमर अब्दुल्ला

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  • Publish Date - May 10, 2026 / 05:41 PM IST,
    Updated On - May 10, 2026 / 05:41 PM IST

(सुमीर कौल)

श्रीनगर, 10 मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर की मौजूदा प्रशासनिक संरचना को ‘‘शासन का सबसे खराब रूप’’ बताते हुए, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल किए जाने पर जोर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कामकाज के नियमों को लेकर केंद्र के साथ मतभेदों को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री ने जम्मू और श्रीनगर के बीच राजनीतिक दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे निहित स्वार्थों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘वे असफल रहे हैं और असफल होते रहेंगे।’’

उन्होंने दोनों क्षेत्रों के बीच भावनात्मक खाई को पाटने में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में ‘दरबार स्थानांतरण’ की बहाली पर भी प्रकाश डाला।

‘दरबार स्थानांतरण’ के तहत सरकार हर छह महीने में अपना कामकाज श्रीनगर (गर्मियों में) और जम्मू (सर्दियों में) के बीच स्थानांतरित करती है।

उमर अब्दुल्ला ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए तर्क दिया कि 90 निर्वाचित विधायकों वाले एक क्षेत्र को पुडुचेरी जैसे छोटे क्षेत्रों के बराबर मानना समझ से परे है, जहां केवल 30 विधायक हैं।

उन्होंने अपने पहले के रुख को दोहराया कि दोहरी सत्ता प्रणाली, जहां दो सत्ता संरचनाएं मौजूद हैं, ‘‘विनाश का नुस्खा’’ है।

मुख्यमंत्री ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए पूछा, ‘‘क्या आपको 30 विधायकों वाली छोटी विधानसभा और 90 विधायकों वाली विधानसभा में फर्क नहीं दिखता और पिछले साल जो कुछ हुआ, उसके बाद भी आपको लगता है कि मौजूदा व्यवस्था जम्मू-कश्मीर के लिए फायदेमंद है।’’

उन्होंने दावा किया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानून-व्यवस्था की स्थिति से दूर रखना कोई लाभ नहीं दे रहा है।

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर के आकार और विस्तार को देखते हुए एक ऐसे शासन मॉडल की आवश्यकता है, जहां निर्वाचित प्रतिनिधि प्रशासन के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हों।

अब्दुल्ला ने हाल ही में यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मैं अब भी उसी विचार पर कायम हूं। मेरा मानना ​​है कि विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था अब तक की सबसे खराब शासन प्रणाली है।’’

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों, शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान और विद्युत विकास निगम सहित कई प्रमुख संस्थानों को स्वतः ही निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ जाना चाहिए था।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं केंद्रीय सेवाओं, कानून व्यवस्था और पुलिस के मुद्दे पर बहस नहीं कर रहा हूं। केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते, ये स्वतः ही गैर-चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र में रहते हैं। लेकिन ये वे संस्थाएं थीं, जो पहले चुनी हुई सरकार के अधीन थीं, और ऐसा होना भी चाहिए।’’

इन मतभेदों के बावजूद, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार और केंद्र सरकार कामकाज के नियमों पर एक समझौते पर पहुंचने के करीब हैं और नए महाधिवक्ता की नियुक्ति के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव अंततः उपयुक्त प्राधिकारियों को भेज दिया गया है।

न्यायिक जांच के बिना सरकारी कर्मचारियों की तत्काल बर्खास्तगी के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर, अब्दुल्ला ने इस प्रक्रिया को ‘‘मनमाना, अपारदर्शी और न्यायिक कसौटी पर उतरने में असमर्थ’’ बताया।

उन्होंने कहा कि यह प्रथा मौजूदा उपराज्यपाल के प्रशासन के दौरान शुरू नहीं हुई थी, बल्कि पिछली भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के दौरान शुरू की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देखिए, हर किसी को अपनी बेगुनाही साबित करने का अधिकार है। किसी कारणवश, इन कर्मचारियों को यह अवसर नहीं दिया गया। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि आगे चलकर, अदालत से राहत मिलने के बाद इनमें से कई लोग सरकारी सेवा में वापस लौट आएंगे।’’

अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा किए गए चुनावी वादों, जिसमें सबसे गरीब परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली और छह मुफ्त गैस सिलेंडर शामिल हैं, का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे गरीब लोगों को बिजली सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

जम्मू के विभिन्न शिविरों में पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि वे (कश्मीरी पंडित) अब भी शिविरों में क्यों हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘कृपया भाजपा से पूछें कि उन्हें वापस लाने के लिए कुछ करने से पहले, वे कितने और चुनावों तक उनके (कश्मीरी पंडितों के) वोट का दोहन करना चाहते हैं?’’

उमर अब्दुल्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जम्मू में कश्मीरी पंडित प्रवासियों के लिए ‘जगती टाउनशिप’ बनाने और उनके लिए नौकरी का कोटा निर्धारित करने का श्रेय देते हुए कहा कि तब से इस समुदाय के लिए कुछ भी नहीं किया गया है।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप