उप्र: 10 दिनों के गतिरोध के बाद जांच के लिए ले जाया गया आईटीबीपी जवान की मां का कटा हाथ

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उप्र: 10 दिनों के गतिरोध के बाद जांच के लिए ले जाया गया आईटीबीपी जवान की मां का कटा हाथ

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 12:03 AM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 12:03 AM IST

कानपुर, 1 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच करीब 10 दिन तक चले गतिरोध के बाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के एक जवान की मां का कटा हुआ दाहिना हाथ जांच के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग को सौंप दिया गया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

चिकित्सकों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने में 20 दिन से एक माह तक का समय लग सकता है।

जिम्मेदारी को लेकर भ्रम और बायोमेडिकल कचरा निपटान नियमों के कथित उल्लंघन के कारण कटा हुआ हाथ कई दिनों तक रेलबाजार थाने के मालखाने में रखा रहा, जिससे विवाद खड़ा हो गया।

महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में तकलीफ और हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण 13 मई को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इलाज के दौरान उनकी स्थिति स्थिर हो गई लेकिन उनका दाहिना हाथ काला पड़ने लगा, जिसके बाद 17 मई को उन्हें पारस अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने गैंगरीन की आशंका जताते हुए आपात स्थिति में उनका हाथ काट दिया। विवाद तब शुरू हुआ, जब कटे हुए अंग को नष्ट करने या जांच के लिए सुरक्षित रखने के बजाय परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के हस्तक्षेप के बाद 25 मई को कृष्णा और पारस अस्पताल के खिलाफ कथित चिकित्सीय लापरवाही तथा उपचार में देरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पूर्वी क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि कटे हुए हाथ को रविवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग को सौंप दिया गया।

उन्होंने बताया कि हिस्टोपैथोलॉजी जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. लुबना खान ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक पैथोलॉजी जांच की सुविधा नहीं है लेकिन ‘हिस्टोपैथोलॉजी’ जांच के लिए नमूना स्वीकार कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद संरक्षित अंग पुलिस को लौटा दिया जाएगा।

पुलिस ने दोनों अस्पतालों से उपचार संबंधी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं तथा संबंधित चिकित्सकों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हरिदत्त नेमी ने पारस अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर कटे हुए अंग को परिजनों को सौंपे जाने पर स्पष्टीकरण मांगा है।

पारस अस्पताल के यूनिट प्रमुख (बिक्री एवं विपणन) नितिन सारस्वत ने बताया कि शल्यक्रिया परिजनों की लिखित सहमति और स्थापित चिकित्सा प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई थी।

उन्होंने बताया कि निर्मला देवी की हालत स्थिर है और अस्पताल जांच में सहयोग कर रहा है।

भाषा सं आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र