एक ही नाम की दो अभ्यर्थियों की समान रैंक के मामले में उप्र की आकांक्षा सफल : यूपीएससी

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एक ही नाम की दो अभ्यर्थियों की समान रैंक के मामले में उप्र की आकांक्षा सफल : यूपीएससी

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  • Publish Date - March 9, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - March 9, 2026 / 07:50 PM IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) सिविल सेवा परीक्षा में एक ही नाम वाली दो अभ्यर्थियों के चयन के दावों के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश की आकांक्षा सिंह ने परीक्षा उत्तीर्ण की है।

सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), 2025 का अंतिम परिणाम शुक्रवार को घोषित किया गया था।

यूपीएससी ने एक बयान में कहा, “मीडिया में आईं कई खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि आकांक्षा सिंह नाम की दो अभ्यर्थियों ने सिविल सेवा परीक्षा, 2025 के अंतिम परिणाम में समान रैंक 301 प्राप्त की है।”

यूपीएससी ने स्पष्ट किया कि आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अभयपुर गांव की निवासी आकांक्षा सिंह (रोल नंबर 0856794, पिता का नाम: रंजीत सिंह, माता का नाम: नीलम सिंह) सफल अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने 301वीं रैंक प्राप्त की है।

बिहार के आरा की रहने वाली दूसरी आकांक्षा सिंह के बारे में भी खबरें आई हैं कि उन्होंने 301वीं रैंक प्राप्त की है। आरा की निवासी आकांक्षा सिंह के दादा ब्रह्मेश्वर सिंह प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना के संस्थापक थे, जिनकी 2012 में हत्या कर दी गई थी।

विवाद तब और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक एडमिट कार्ड वायरल हुआ, जिसमें दोनों का एक ही नाम और रोल नंबर दिखाया गया।

शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए, ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती आकांक्षा ने दावा किया कि उन्होंने दूसरी कोशिश में परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल की है।

गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने इस मामले में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।

उन्होंने फेसबुक पर लिखा था, “यह सामने आया है कि मेरी रैंक और पहचान की नकल की जा रही है।” उन्होंने दो दस्तावेज भी साझा किए, जिन्हें उन्होंने अपना असली पहचान पत्र और ‘ई-समन’ बताया।

एक वीडियो में, गाजीपुर की आकांक्षा ने कहा, “मैं एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हूं, और फिलहाल एम्स-पटना में प्रैक्टिस कर रही हूं। मुझे यह जानकारी मिली है कि एक अन्य लड़की 301वीं रैंक हासिल करने का दावा कर रही है।”

उन्होंने कहा, “यह वीडियो सिर्फ स्पष्टता के लिए है। यदि दोनों एडमिट कार्ड पर क्यूआर कोड स्कैन किए जाएं, तो मामला बहुत स्पष्ट हो जाएगा।”

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप