अमेरिकी शुल्क विधेयक पर नजर है, वीजा नियमों को लेकर अमेरिका के संपर्क में हैं: भारत

Ads

अमेरिकी शुल्क विधेयक पर नजर है, वीजा नियमों को लेकर अमेरिका के संपर्क में हैं: भारत

  •  
  • Publish Date - July 18, 2026 / 12:38 AM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 12:38 AM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह रूसी कच्चा तेल खरीदने पर भारत, चीन और कुछ अन्य देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने के प्रस्ताव वाले अमेरिकी विधेयक से जुड़े घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।

भारत ने साथ ही कहा कि अमेरिकी वीजा नीतियों के कारण भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियां कम करने के लिए वह अमेरिका के अधिकारियों के संपर्क में है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने संबंधी विधेयक डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था।

खबरों के अनुसार, अमेरिका के करीब 60 सीनेटर इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम इन घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं और हमें प्रस्तावित विधेयक की जानकारी है।’’

रूसी तेल की खरीद से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक तेल खरीदने का सवाल है, तो हम दुनिया के विभिन्न देशों से तेल खरीदते हैं। यह ऊर्जा स्रोतों को लेकर हमारे दृष्टिकोण पर आधारित है।’’

अमेरिका ने विदेशी छात्रों, विनिमय कार्यक्रम के तहत आने वाले लोगों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को सख्त कर दिया है। इसके साथ ही दशकों पुरानी वह नीति खत्म हो गई है जिसके तहत वे बिना सरकारी निगरानी के देश में अनिश्चित काल तक रह सकते थे। इस कदम से बड़ी संख्या में भारतीयों पर असर पड़ने की आशंका है।

इस संबंध में भारत ने कहा कि वह भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियां कम करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है।

जायसवाल ने अमेरिका द्वारा वीजा नियमों में घोषित बदलावों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘हमने वीजा नियमों से जुड़ी कुछ खबरें देखी हैं। वीजा नियम, वीजा जारी करने की प्रक्रिया और आव्रजन से जुड़े मामले किसी भी देश के संप्रभु अधिकार के दायरे में आते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, वैध यात्रियों और छात्रों सहित अन्य लोगों को होने वाली परेशानियों के मामले जब हमारे संज्ञान में लाए जाते हैं और उन्हें अमेरिका से सहयोग की जरूरत होती है, तो हम अपने लोगों की परेशानियां कम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के समक्ष ये मुद्दे उठाते हैं।’’

भाषा सिम्मी संतोष

संतोष