एक सरकारी संस्था का दूसरे संस्थान के खिलाफ आरटीआई का इस्तेमाल करना ‘बेहद चिंताजनक’: सीआईसी

एक सरकारी संस्था का दूसरे संस्थान के खिलाफ आरटीआई का इस्तेमाल करना ‘बेहद चिंताजनक’: सीआईसी

एक सरकारी संस्था का दूसरे संस्थान के खिलाफ आरटीआई का इस्तेमाल करना ‘बेहद चिंताजनक’: सीआईसी
Modified Date: July 30, 2026 / 08:27 pm IST
Published Date: July 30, 2026 8:27 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) एक सरकारी संस्था की ओर से दूसरी सरकारी संस्था के खिलाफ सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का इस्तेमाल किये जाने को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने ‘बेहद चिंताजनक मामला’ करार दिया है।

सीआईसी की ओर से यह चिंता तब जताई गई जब केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) को नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से बुनियादी जानकारी पाने के लिए पहले सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का सहारा लेना पड़ा और बाद में आयोग के पास जाना पड़ा।

हाल ही में दिए गए एक आदेश में सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने इस स्थिति को ‘बेहद परेशान करने वाला और गंभीर चिंता का विषय’ बताया।

उन्होंने कहा कि यह ‘सचमुच दुखद’ है कि एक वैधानिक आयोग को अपनी ही सुरक्षा जमा राशि के मिलान और धन वापसी से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए दूसरे वैधानिक आयोग से हस्तक्षेप का अनुरोध करना पड़ा।

यह मामला मई 2024 में सीईआरसी के एक अधिकारी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ। सीईआरसी के चंद्रलोक बिल्डिंग से नौरोजी नगर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में स्थानांतरित होने के बाद सुरक्षा जमा और उसकी वापसी के बारे में एनडीएमसी को कई बार आधिकारिक पत्र भेजे जाने और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला था।

आयोग ने देखा कि न तो आरटीआई आवेदन और न ही पहली अपील पर कोई जवाब मिला। जानकारी दो साल से अधिक समय बाद, आठ जुलाई 2026 को तब दी गई जब मुख्य सूचना अधिकारी ने सुनवाई का नोटिस जारी किया।

आयोग ने कहा कि जो असल में सरकारी रिकॉर्ड की एक प्रति थी, उसे देने में हुई देरी का कोई कारण नहीं बताया गया।

एनडीएमसी द्वारा आखिर में दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 4.86 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा में से नगर निकाय ने 3.48 करोड़ रुपये वापस किए, जबकि 1.38 करोड़ रुपये कथित बकाया और ब्याज के तौर पर समायोजित कर लिए गए।

सीईआरसी का कहना था कि कोई बकाया नहीं था और आरोप लगाया कि यह मांग किराए में पिछले समय से लागू किए गए पूर्व व्यापी बदलाव (रेट्रोस्पेक्टिव रिविजन) के कारण की गई थी।

भाषा संतोष नरेश

नरेश


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