Uttar Pradesh Politics Latest News || Image- AI Generated File
लखनऊ: 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सियासी दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। बंगाल और असम में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाली सत्ताधारी भाजपा को योगी की अगुवाई में जहाँ फिर से वापसी की उम्मीद हैं। (Uttar Pradesh Politics Latest News) पिछले लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को भरोसा है कि, वह लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन विधानसभा चुनावों में भी दोहराएगी। हालाँकि अखिलेश के इस भरोसे को आज बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया है।
जानकारी के मुताबिक़ सपा के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम समेत करीब 30 पदाधिकारियों ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। दरअसल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपना कुनबा बढ़ाने और संगठन विस्तार के अभियान को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में गुरुवार को पार्टी को उस वक्त बड़ी मजबूती मिली, जब समाजवादी पार्टी और बुनकर मजदूर विकास समिति से जुड़े लगभग 30 महत्वपूर्ण पदाधिकारियों, ग्राम प्रधानों और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने सुभासपा का दामन थाम लिया। पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर की उपस्थिति में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में इन सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
पार्टी में शामिल होने वाले प्रमुख चेहरों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम का नाम सबसे ऊपर है, जिनका सुभासपा में आना विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके साथ ही बुनकर मजदूर विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शहाबुद्दीन अंसारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नाजिम अंसारी और युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताजुद्दीन अंसारी ने भी पार्टी की विचारधारा पर भरोसा जताया। (Uttar Pradesh Politics Latest News) सदस्यता लेने वाले अन्य नेताओं में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष खालिद सैफी, राष्ट्रीय सचिव अयूब अंसारी, प्रदेश प्रभारी कारी लाइक अंसारी और कई जिला अध्यक्ष शामिल हैं। ये नेता दिल्ली, गाजियाबाद, बिजनौर, शाहदरा, प्रतापगढ़, अमरोहा और लखनऊ जैसे विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे सुभासपा का प्रभाव कई जिलों में बढ़ने की उम्मीद है।
इस अवसर पर अरुण राजभर ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर तंज कसते हुए इसे केवल राजनीतिक स्वार्थ का जरिया बताया। राजभर ने कहा कि सपा का यह नारा जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि उनकी अपनी राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से बदलता रहता है। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके लिए पीडीए का असली अर्थ पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश है, जो केवल परिवारवाद तक सीमित है। राजभर ने दावा किया कि जिस तरह से विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के नेता सुभासपा से जुड़ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि जनता और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता अब बदलाव चाहते हैं। संगठन में हुए इस बड़े विस्तार से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और इसे आगामी चुनावी जंग के लिए सुभासपा की एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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