उत्तराखंड: 2027 के हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले अखाड़ा परिषद में विवाद गहराया

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उत्तराखंड: 2027 के हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले अखाड़ा परिषद में विवाद गहराया

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  • Publish Date - June 28, 2026 / 07:06 PM IST,
    Updated On - June 28, 2026 / 07:06 PM IST

हरिद्वार, 28 जून (भाषा) उत्तराखंड के हरिद्वार में अगले वर्ष होने वाले अर्धकुंभ से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भीतर वर्चस्व की लड़ाई फिर तेज हो गई है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि परिषद के एक गुट ने बहुमत होने का दावा करते हुए नई कार्यकारिणी समिति के गठन की घोषणा की।

यह घोषणा शनिवार देर रात यहां श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल में हुई संतों की सर्वोच्च संस्था की बैठक में की गई।

बैठक की अध्यक्षता महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने की, जो परिषद के इस गुट का नेतृत्व भी कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में रवींद्र पुरी को दोबारा अध्यक्ष चुना गया और नए पदाधिकारियों की सूची की भी घोषणा की गई।

उन्होंने बताया कि अखाड़ा परिषद के भीतर जारी गुटबाजी का असर 2027 में हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ की तैयारियों के साथ-साथ उज्जैन और नासिक में होने वाले आगामी कुंभ आयोजनों पर भी पड़ने की आशंका है।

उत्तराखंड सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह वर्ष 2027 के अर्धकुंभ का आयोजन पूर्ण कुंभ मेले के स्तर पर करेगी।

राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस योजना को लेकर साधु-संतों से चर्चा करने के लिए कई बार हरिद्वार का दौरा कर चुके हैं।

हालांकि अधिकतर अखाड़े इस आयोजन को बड़े स्तर पर कराने के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ संतों और संगठनों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं।

सूत्रों ने बताया कि अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के निधन के बाद परिषद दो गुटों में बंट गई थी।

उस समय एक गुट ने आठ अखाड़ों के समर्थन का दावा करते हुए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी को अध्यक्ष और निर्मोही अखाड़े के महंत राजेंद्र दास को महासचिव नियुक्त किया था।

दूसरे गुट ने निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी को अपना प्रमुख नियुक्त किया था।

दूसरे गुट को पांच अखाड़ों का समर्थन प्राप्त था।

सूत्रों ने बताया कि अर्धकुंभ नजदीक आने के साथ ही आंतरिक प्रतिद्वंद्विता फिर से उभर आई है।

शनिवार को हुई बैठक में इस गुट ने दावा किया कि 13 अखाड़ों में से आठ के प्रतिनिधि इसमें मौजूद थे।

सूत्रों ने बताया कि महंत रवींद्र पुरी को दोबारा अध्यक्ष और महंत राजेंद्र दास को महासचिव चुने जाने के अलावा, इस गुट ने उदासीन बड़ा अखाड़ा के महंत दुर्गा दास को उपाध्यक्ष नियुक्त किया।

उन्होंने कहा कि करौली शंकर महाराज को सचिव-सह-संयोजक, अयोध्या के हनुमानगढ़ी के संजय दास महाराज को राष्ट्रीय प्रवक्ता और अटल अखाड़ा के सत्यम गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सूत्रों ने बताया कि इस गुट ने पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महंत भगत राम महाराज, मुरली दास महाराज और अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञान दास को शामिल करते हुए एक संरक्षक मंडल का भी गठन किया है।

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल