नैनीताल, 21 मई (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कथित रूप से वैध अनुमतियों और यात्रा दस्तावेजों के बिना प्रदेश में नेपाली नागरिकों के बसने पर चिंता व्यक्त करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से एक हलफनामे के जरिए स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह के बाद होगी।
नैनीताल निवासी पवन जाटव ने 2024 में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विदेशी नागरिकों द्वारा भूमि खरीदने पर कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद कई नेपाली नागरिकों ने राज्य में स्थायी निवास प्राप्त कर लिया है तथा भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति प्राप्त किए बिना संपत्तियां खरीदी हैं।
राज्य सरकार ने भी इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि राज्य ने अपने हलफनामे में इस आरोप का स्पष्ट रूप से खंडन नहीं किया है कि कुछ निजी प्रतिवादी वैध दस्तावेजों के बिना राज्य में रह रहे हैं।
अदालत ने यह भी पाया कि प्राथमिकी दर्ज करने के अलावा हलफनामे में सरकार द्वारा इस मुद्दे के समाधान के लिए अपनाई गई किसी ठोस नीति या कार्य योजना का उल्लेख नहीं किया गया है।
एक पूरक हलफनामे में राज्य ने भारत और नेपाल के बीच 1950 की शांति और मैत्री संधि के अनुच्छेद सात का हवाला देते हुए भारत में नेपाली नागरिकों के बसने को उचित ठहराया। राज्य ने कहा कि संधि के तहत प्रदान किए गए पारस्परिक अधिकारों के आधार पर नेपाली नागरिकों को भारत में रहने की अनुमति दी गई थी।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि अनुच्छेद सात निवास, संपत्ति के स्वामित्व, व्यापार, वाणिज्य और आवागमन से संबंधित मामलों में दोनों देशों के नागरिकों के लिए पारस्परिक विशेषाधिकारों की परिकल्पना करता है। अदालत ने कहा कि राज्य ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि नेपाल में भारतीय नागरिकों को इस संबंध में कौन से अधिकार और विशेषाधिकार दिए गए हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्टीकरण आवश्यक है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या नेपाली नागरिक सरकार से किसी औपचारिक अनुमति के बिना भारत में बस सकते हैं।
अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए एक और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
भाषा सं दीप्ति गोला
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