नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) संसद में बृहस्पतिवार को पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत काम की मांग में उल्लेखनीय गिरावट के मद्देनजर विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम लागू किया, जो पिछली योजना का एक व्यापक वैधानिक संशोधन है।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 में लागू हुआ था और इसने मजदूरी आधारित रोजगार प्रदान किया, ग्रामीण आय को स्थिरता दी और बुनियादी ढांचा तैयार किया, लेकिन समय के साथ ग्रामीण रोजगार की आवश्यकताओं का स्वरूप बदल गया, जो कार्यक्रम की उपलब्धियों और इसके स्वरूप एवं उद्देश्यों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
आर्थिक समीक्षा में नाबार्ड की ओर से नवंबर 2025 में जारी ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं मत सर्वेक्षण (आरईसीएसएस) का हवाला दिया गया है, जिसमें मजबूत उपभोग, आय में उच्च वृद्धि, बढ़ते निवेश, औपचारिक ऋण तक बेहतर पहुंच, मुद्रास्फीति में गिरावट, बेहतर ऋण भुगतान शर्तें और बुनियादी ढांचे से संतुष्टि के चलते ग्रामीण आर्थिक परिदृश्य में व्यापक मजबूती दर्शायी गई थी।
इसमें एक अन्य शोध रिपोर्ट का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि ग्रामीण उपभोग 17 तिमाहियों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और सभी घटनाक्रम सामूहिक रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत देते हैं।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इन निष्कर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भरता में कमी की पुष्टि होती है।
इसमें कहा गया है, “हालांकि, मनरेगा लंबे समय से ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच रहा है, लेकिन हाल के रुझान इस योजना के तहत काम की मांग में उल्लेखनीय गिरावट दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2021 में महामारी के दौरान व्यक्ति दिवस 389.09 करोड़ के चरम पर पहुंच गए थे, लेकिन वित्त वर्ष 2026 (31 दिसंबर 2025 तक) में ये घटकर लगभग 183.77 करोड़ रह गए, जो 53 फीसदी से अधिक की गिरावट है।”
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, “मनरेगा के तहत काम की मांग में यह गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में कमी के बीच देखने को मिली है, जो 2020-21 में 3.3 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 2.5 प्रतिशत हो गई। इससे पता चलता है कि कई ग्रामीण परिवार गैर-कृषि या अन्य गैर-मनरेगा कार्यों का लाभ उठा रहे होंगे।”
इसमें कहा गया है कि इन घटनाक्रमों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार को उजागर किया है, जो मजबूत व्यापक आर्थिक आधारभूत कारकों और आजीविका के स्रोत के रूप में मनरेगा पर निर्भरता में कमी से प्रेरित है।
भाषा
पारुल नोमान
नोमान
नोमान