बेंगलुरु, 26 जनवरी (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को आवेदन सौंपकर उनसे अनुरोध किया कि वे “नफरती भाषण विधेयक” को अपनी मंजूरी न दें और इसे भारत के राष्ट्रपति के विचारार्थ रखें।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सचिव और सामाजिक सद्भाव प्रभारी देवजी भाई रावत ने संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की और एक अर्जी सौंपी।
कर्नाटक का नफरती भाषण और घृणा अपराध (निषेध) विधेयक, 2025, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जद (एस) के कड़े विरोध के बावजूद दिसंबर में राज्य विधानसभा के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया था। वर्तमान में यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत है ताकि इसे कानून बनाया जा सके।
इस विधेयक में घृणा अपराध के लिए एक वर्ष की कैद की सजा का प्रस्ताव है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बार-बार अपराध करने पर अधिकतम सात वर्ष की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
अर्जी में कहा गया, “प्रस्तावित विधेयक पुलिस को अत्यधिक विवेकाधिकार प्रदान करता है, जिसका उद्देश्य राज्य की विभिन्न कार्रवाइयों की वास्तविक आलोचना को दबाना है। अतः, हम आपसे निवेदन करते हैं कि आप विधेयक को अपनी स्वीकृति न दें और इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत माननीय राष्ट्रपति के विचारार्थ रखें।”
विहिप का तर्क है कि यह विधेयक “विभिन्न विषयों का एक समूह” है जो घृणास्पद भाषणों को रोकने के बहाने हर व्यक्ति को अपराधी ठहराने का जोखिम पैदा करता है। संगठन का मानना है कि विधेयक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध के बीच अंतर करने में विफल रहा है।
विपक्षी भाजपा और जद (एस) समेत कई अन्य संगठनों ने राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी न देने का अनुरोध करते हुए पहले ही अर्जी दे रखी है।
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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