नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन से सनातन धर्म पर उनकी टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी की मांग की और तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष से उन्हें सदन से निष्कासित करने का आग्रह किया।
विहिप ने उदयनिधि के बयान को सदन की कार्यवाही से हटाने का भी आग्रह किया।
विहिप ने द्रमुक नेता की टिप्पणी पर चुप्पी साधने के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के दलों और तमिलनाडु सरकार पर भी हमला किया और कहा कि उनकी ‘चुप्पी बहुत कुछ कहती है’।
यह टिप्पणी उदयनिधि स्टालिन द्वारा मंगलवार को सनातन धर्म के ‘उन्मूलन’ का आह्वान करने के बाद आई है। उदयनिधि ने दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है। उन्होंने एक तरह से सितंबर 2023 में दिए गए अपने विवादास्पद बयान को दोहराया है।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने द्रमुक नेता पर बार-बार सनातन धर्म का अपमान करने और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
बंसल ने कहा, ‘‘उन्हें ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी चाहिए। अध्यक्ष को न केवल सदन की कार्यवाही से ऐसे शब्दों को हटाना चाहिए, बल्कि ऐसे विधायक को विधानसभा से निष्कासित भी करना चाहिए।’’
उदयनिधि पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव हारने के बावजूद कुछ लोग सबक नहीं सीखते।
उन्होंने पूछा, ‘‘सनातन पर हमला करना उनकी अदात बन गई है। वह वर्षों से कहते आ रहे हैं कि सनातन का सफाया कर देंगे। लेकिन जो लोग सनातन को नष्ट करने आए थे, वह स्वयं सदियों पहले लुप्त हो गए। सनातन शाश्वत है। उनकी हैसियत क्या है कि वह इसे मिटा सकते हैं?’’
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बंसल ने लिखा, ‘‘रस्सी जल गई पर बल नहीं गया, शायद अपमानित होने की इच्छा अब भी बाकी है।’’
उन्होंने कहा कि कुछ लोग विचारधारा से सीखते हैं और कुछ अदालती फटकार से, लेकिन कुछ इतने जिद्दी होते हैं कि सार्वजनिक अस्वीकृति के बाद भी नहीं सीखते।
द्रमुक की हालिया चुनावी हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद भी द्रमुक ने कुछ नहीं सीखा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रिय उदयनिधि, अपना ज्ञान थोड़ा बढ़ाइए। सनातन धर्म हमेशा लोगों को एकजुट करता है, उन्हें कभी विभाजित नहीं करता।’’
द्रमुक नेता पर निशाना साधते हुए बंसल ने कहा, ‘‘भले ही उनका नाम उदयनिधि है, लेकिन वह अपनी ही पार्टी का अंत कर देंगे।”
उन्होंने कहा कि ‘सनातन की शक्ति’ ने उदयनिधि स्टालिन, उनकी पार्टी और उनकी विचारधारा को ‘विपक्ष में बैठने’ के लिए मजबूर कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘याद रखिए, अनगिनत लोग जिन्होंने सनातन को मिटाने का सपना देखा था, वे खुद इतिहास से कई बार मिट चुके हैं। आपकी सनातन-विरोधी मानसिकता का भी जल्द ही अंत होगा।’’
विहिप नेता ने इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की पार्टियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि ‘इंडी’ गठबंधन की पार्टियों को स्पष्ट करना चाहिए कि वे सनातन को खत्म करने वालों के साथ हैं या उसकी रक्षा करने वालों के साथ।
बंसल ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा, ‘‘उनकी चुप्पी और मौन सहमति बहुत कुछ कहती है।’’
उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी शांतिप्रिय लोग हैं, लेकिन जब उनके धर्म पर हमला होता है तो वे जवाब देना जानते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि विपक्ष ‘तमिल थाई वझथु’ (तमिल प्रार्थना गीत) को हाशिए पर धकेलने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘सनातन धर्म, जो लोगों को विभाजित करता है, उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।’’ उदयनिधि स्टालिन द्वारा इससे पहले 2023 में की गई इसी तरह की टिप्पणियों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके चलते द्रमुक नेता को हिंदू विचारधारा के समर्थक संगठनों की आलोचना और अदालती मुकदमों का सामना करना पड़ा था।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश