उपराष्ट्रपति ने समुद्र में मत्स्य दोहन के प्राधिकार पत्र निर्गत करने संबंधी कार्यक्रम की शुरुआत की

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उपराष्ट्रपति ने समुद्र में मत्स्य दोहन के प्राधिकार पत्र निर्गत करने संबंधी कार्यक्रम की शुरुआत की

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 04:33 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 04:33 PM IST

भुवनेश्वर, नौ जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को यहां खुले समुद्र में संधारणीय मत्स्य दोहन के लिए प्राधिकार पत्र (एलओए) निर्गत करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की और ओडिशा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन मिशन दस्तावेज का विमोचन किया।

इस मौके पर राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल भारत के समुद्री इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसके तहत भारतीय मछुआरे देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्र की विशाल क्षमता का संधारणीय रूप से उपयोग कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछुआरा समुदायों के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जो मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि के नए युग के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा है और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र है, जिसमें अपार समुद्री संपदा मौजूद है और अभी तक इसका पूर्ण उपयोग नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियां तट के करीब ही होती रही हैं, लेकिन नयी व्यवस्था से भारतीय मछुआरे टूना जैसी उच्च कीमत वाली मछलियां पकड़ने के लिए गहरे समुद्र में भी आत्मविश्वास से जा सकेंगे।

भारत में मत्स्य क्षेत्र के तेजी से हुए विकास को रेखांकित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसका योगदान लगभग आठ प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका का साधन है और पिछले वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 73 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक हुआ है।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से भारत की निर्यात क्षमता और बढ़ेगी तथा मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, शीत भंडारण शृंखला, परिवहन, पैकेजिंग, संपूर्ण संचालन तंत्र और निर्यात सेवाओं में रोजगार सृजित होगा।

उन्होंने संधारणीय मत्स्य दोहन को नैतिक दायित्व बताते हुए कहा कि आर्थिक प्रगति समुद्री संसाधनों को संरक्षित रखने के साथ चलनी चाहिए।

उन्होंने डिजिटल प्राधिकरण प्रणालियों, पोत ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अवैध, अनधिकृत और अनियमित मत्स्य दोहन के खिलाफ सख्त अनुपालन के महत्व पर बल दिया।

युवाओं से मत्स्य क्षेत्र को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक अवसरों से प्रेरित आधुनिक पेशे के रूप में अपनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने संस्थानों से ज्ञान, प्रौद्योगिकी और वित्त पोषण द्वारा मछुआरा समुदायों को समर्थन जारी रखने का आग्रह किया, जिससे 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को साकार किया जा सके।

इस अवसर पर देशभर के दस मत्स्य उत्पादक संगठनों (एफपीपीओ) और मछुआरों को खुले समुद्र में मत्स्य दोहन के लिए प्राधिकार पत्र प्रदान किए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नए ढांचे के तहत प्राधिकार पत्र जारी करने में मत्स्य सहकारी समितियों, मत्स्य उत्पादक संगठनों और मछुआरों को प्राथमिकता दी गई है।

एक दिवसीय दौरे पर सुबह भुवनेश्वर पहुंचे राधाकृष्णन ने ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी तथा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, धर्मेंद्र प्रधान और एस. पी. सिंह बघेल की मौजूदगी में इन दोनों पहलों की शुरुआत की।

अधिकारियों ने बताया कि भारतीय ध्वज वाली मछुआरों की नौकाओं के लिए खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी दिशानिर्देशों के तहत प्राधिकरण पत्र (एलओए) एक अनिवार्य प्रावधान है।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि खुले समुद्र में मत्स्य पालन या उससे संबंधित गतिविधियां संचालित करने वाली भारतीय ध्वज वाली नौकाओं के लिए यह प्राधिकरण पत्र (एलओए) एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था प्रदान करता है। इससे मछुआरों और जहाज संचालकों के लिए नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया सरल होगी।

अधिकारियों ने बताया कि ‘ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन’ (2026-2036) राज्य सरकार की प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य ओडिशा के अपतटीय व गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की क्षमता का दोहन करना तथा राज्य को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और समुद्री उत्पादों के निर्यात के अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करना है।

भाषा खारी पवनेश

पवनेश