(तस्वीरों के साथ)
वायनाड (केरल), नौ जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने बृहस्पतिवार को वायनाड सुरंग मार्ग परियोजना के लिए पर्यावरण मंज़ूरी के बारे में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की टिप्पणियों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि सरकार हाल ही में हुए भूस्खलन की आपदा से निपटने में अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित इलाके का दौरा करने के बाद विजयन ने पत्रकारों से कहा कि अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना के लिए पर्यावरण मंज़ूरी एक पारदर्शी और कानूनी रूप से सही प्रक्रिया के ज़रिए ली गई थी, न कि किसी ‘‘हेरफेर’’ से, जैसा कि मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सबकुछ पारदर्शिता के साथ किया गया।’’
अधिकारियों ने बताया कि वायनाड भूस्खलन के बाद बृहस्पतिवार को घटनास्थल से तीन और शव मिलने से मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
विजयन ने कहा कि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन 2023 में तय प्रक्रिया के तहत पूरा किया गया और इसके बाद परियोजना को राज्य तथा केंद्र, दोनों सरकारों से स्वीकृति मिली थी।
विजयन ने राज्य के मंत्रियों पर ज़िम्मेदारी से बचने के लिए ‘‘दोष दूसरों पर मढ़ने की कोशिश’’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए जान-बूझकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने आपदा की तैयारी में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में भारी बारिश हुई, लेकिन पर्याप्त एहतियाती उपाय नहीं किए गए।
उन्होंने सवाल किया कि पहले से कोई प्रभावी चेतावनी क्यों नहीं दी गई। विजयन ने आरोप लगाया कि भूस्खलन से पहले केवल ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया।
मीडिया में आईं खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि आपदा आने के बाद ही ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया।
वायनाड सुरंग मार्ग को ‘‘विकास की अपार संभावनाओं’’ वाली परियोजना बताते हुए विजयन ने कहा कि यह राज्य के लिए आवश्यक है और इसे बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री सतीशन ने बुधवार को कहा था कि सरकार वायनाड भूस्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस बात की भी जांच की जाएगी कि क्या निर्माण कंपनी ने सुरंग परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी मंज़ूरी देते समय केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन किया है।
उन्होंने कहा कि वायनाड को कोझिकोड से जोड़ने वाली सुरंग का काम इन दोनों जांच के पूरा होने के बाद ही फिर से शुरू होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि पिछली एलडीएफ सरकार के एक अध्ययन में यह नतीजा निकला था कि इस परियोजना को लागू नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद, राज्य सरकार ने कई कड़ी शर्तें लगाकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
भाषा
नेत्रपाल पवनेश
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