गहन समीक्षा के बाद ‘अनुपयुक्त’ पुलिसकर्मियों को वीआरएस की पेशकश की जाएगी: असम डीजीपी

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गहन समीक्षा के बाद ‘अनुपयुक्त’ पुलिसकर्मियों को वीआरएस की पेशकश की जाएगी: असम डीजीपी

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  • Publish Date - May 8, 2023 / 04:26 PM IST,
    Updated On - May 8, 2023 / 04:26 PM IST

गुवाहाटी, आठ मई (भाषा) असम पुलिस ने 650 से अधिक कर्मियों की एक सूची तैयार की है जो कथित तौर पर शराब पीने के आदी हैं या मोटापे से ग्रस्त हैं। ऐसे लोगों तथा गहन समीक्षा के बाद ड्यूटी के लिए अनुपयुक्त पाए गए जाने वालों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश की जाएगी। यह जानकारी असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जी पी सिंह ने सोमवार को यहां दी।

डीजीपी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पुलिस से ‘‘अनुपयुक्त लोगों’’ से छुटकारा पाने की कवायद बल के सभी संगठनों और शाखाओं में की जाएगी।

सिंह ने कहा, ‘‘हमारे पास पहले से ही लगभग 680 व्यक्तियों की एक सूची है। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि बिना तार्किक आधार के कोई नाम न जोड़ा जाए, हमने बटालियन और जिलों में समितियों का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता एक डिप्टी कमांडेंट या एक अतिरिक्त एसपी-रैंक अधिकारी करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि ये समितियां जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) या बटालियन कमांडेंट को अपनी रिपोर्ट देंगी, जो फिर इसे पुलिस मुख्यालय में जमा करेंगे। सिंह ने कहा कि सूची की फिर से एक समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी जिसमें प्रशिक्षण और सशस्त्र पुलिस इकाई के साथ-साथ कानून व्यवस्था और प्रशासन के लोग होंगे।

सिंह ने कहा कि समिति अंत में उन कर्मियों की सूची तैयार करेगी जिन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सूची तैयार करने की प्रक्रिया को इस तरह से सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि ‘किसी गलत व्यक्ति’ को वीआरएस की पेशकश न की जाए और इसलिए नामों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा।

सिंह ने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची में हैं, लेकिन वीआरएस लेने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें कम से कम ‘फील्ड ड्यूटी’ नहीं दी जाएगी।

शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमने पुलिस के अन्य संगठनों के साथ बैठक की और उन्हें इसी तरह की सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है।’

डीजीपी ने कहा कि राज्य पुलिस बल की कुल संख्या लगभग 70,000 है। उन्होंने कहा कि आईपीएस स्तर के अधिकारियों सहित पुलिस अधिकारियों को फिटनेस बनाए रखने के लिए कहा गया है ताकि वे उदाहरण पेश कर सकें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इसके लिए तीन-चार महीने का समय दिया गया है।

भाषा अमित माधव

माधव