तिरुवनंतपुरम, नौ जुलाई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. एम. हसन ने बृहस्पतिवार को अनाक्कमपोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना पर नये पर्यावरणीय अध्ययन तक काम स्थगित करने की मांग की।
हालांकि, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि वायनाड में हाल में हुए भूस्खलन के कारण इस महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा परियोजना को नहीं रोका जाना चाहिए।
वायनाड में सुरंग परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन में छह लोगों की मौत होने के दो दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष हसन ने मांग की कि जब तक एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति नया पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) नहीं कर लेती, तब तक निर्माण कार्य स्थगित रखा जाए।
सात जुलाई को वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने वाली प्रस्तावित सुरंग परियोजना के कल्लाडी हिस्से में भूस्खलन हुआ था। बृहस्पतिवार को तीन और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई।
हसन ने एक बयान में आरोप लगाया कि परियोजना क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने भूस्खलन के खतरे से अवगत होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष एवं वर्तमान मुख्यमंत्री वी डी सतीशन और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने व्यापक पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) कराये बिना परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हालांकि, वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया और यूडीएफ को विकास विरोधी करार दिया।
हसन ने आरोप लगाया कि परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की एक संदिग्ध रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि परियोजना क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को गलत जानकारी उपलब्ध कराई गई।
कांग्रेस नेता ने मिट्टी की खुदाई और उसके निस्तारण में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्माण कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं, गोविंदन ने कहा कि भूस्खलन की इस त्रासदी को सुरंग जैसी प्रमुख विकास परियोजनाओं को रोकने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केंद्रीय एजेंसियों द्वारा तैयार रिपोर्ट सहित विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर शुरू की गई थी और यदि उन रिपोर्टों में कोई कमी है तो उसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह घटना पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ढहने के कारण हुई।
लोक निर्माण मंत्री पी के बशीर ने स्पष्ट किया कि सरकार की परियोजना छोड़ने की कोई योजना नहीं है और सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘परियोजना को रोकने का कोई इरादा नहीं है। सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। हम सभी पहलुओं की जांच करेंगे और तय करेंगे कि परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे कैसे बढ़ाया जाए।’’
बशीर ने कहा कि सुरंग परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन हालिया भूस्खलन ने ऐसी चिंताएं पैदा की हैं जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस बात की गहन जांच करेंगे कि परियोजना में कहीं कोई वैज्ञानिक या प्रक्रियागत चूक तो नहीं हुई। इस आकलन के बाद ही निर्माण कार्य के भविष्य को लेकर फैसला किया जाएगा।’’
मंत्री की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री वी डी सतीशन द्वारा एक दिन पहले दिए गए उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वायनाड भूस्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह भी जांच की जाएगी कि सुरंग परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देते समय केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का निर्माण कंपनी ने पालन किया था या नहीं। उन्होंने कहा था कि वायनाड को कोझिकोड से जोड़ने वाली इस सुरंग का निर्माण कार्य इन दोनों जांच के पूरा होने के बाद ही फिर से शुरू किया जाएगा।
भाषा अमित नरेश
नरेश