दिलजीत दोसांझ अंगद बेदी, तापसी पन्नू सतीश कौशिश फिल्म सूरमा रिलीज हो चुकी है फिल्म का ट्रेलर देखकर याकिन हो गया था कि ये फिल्म शानदार बायोपिक होगी लेकिन फिल्म में क्या खास है आइए जानते है। सूरमा को डायरेक्ट किया है शाह अली ने ये सच्ची कहानी भारतीय हॉकी टीम के प्लेयर और पूर्व कप्तान संदीप सिंह की लाइफ पर बेस्ड है। जिनका रोल प्ले किया है. दिलजीत दोसांझ ने फिल्म की कहानी शुरु होती है 1994 में पंजाब के शाहबाद गांव से जहां संदीप सिंह उसका भाई विक्रमजीत सिंह परिवार के साथ रहते हैं. संदीप सिंह को बचपन से हॉकी खेलने का शौक रहता है वो अपने भाई विक्रमजीत की तरह हॉकी खेलना चाहता है लेकिन सख्त मिजाज़ कोच से नन्हा संदीप परेशान हो जाता है और वो हॉकी छोड़कर अपने पापा के कहने पर हॉकी स्टीक लेकर खेत में चिढ़िया भगाने लगता है और यहां पर धीरे धीरे वो ड्रेग फ्लिकर भी जाता है लेकिन वो इससे बात से अंजान रहता है. सालों बाद संदीप अपने भाई विक्रमजीत के साथ हॉकी की प्रेक्टिक्स देखने जाता है जहां उसकी मुलाकात होती है हरप्रीत कौर(तापसी पन्नू) से..जिससे संदीप को पहली नजर में प्यार हो जाता है.लेकिन हरप्रीत भी नेशनल हॉकी प्लेयर है और वो चाहती है कि संदीप भी हॉकी खेलेऔर प्यार की खातिर संदीप हॉकी की प्रेक्टिक्स शुरु कर देता है.
सच्चे ”सूरमा” की कहानी…3.5/5
दिलजीत ने जीता दिल pic.twitter.com/muXtFJGPYm— neelam ahirwar raj (@neelamahirwarra) July 13, 2018
ऊधर विक्रमजीत का सिलेक्शन इंडियन हॉकी टीम में नहीं होता।और वो उदास हो जात है लेकिन जब वो खेत में संदीप को खेलते देखता तो उसे अपना अधूरा सपना संदीप में दिखाई देता है. उसे याकिन हो जाता है कि संदीप की ड्रैग फ्लिक देखकर अच्छे अच्छों की बोलती बंद हो जाएगी.बस फिर विक्रमजीत संदीप को हॉकी खेलने और उसके दांव पेंच सीखाने में मदद करता है और भाई के मार्गदर्शन और कोच की मदद से वो इंडियन हॉकी टीम में सिलेक्ट हो जाता है..और संदीप सिंह को हॉकी के मैदान में नाम दिया जाता है। ड्रैग ‘फ्लिकर सिंह’ लेकिन साल 2006 में संदीप सिंह की लाइफ में वो मोड आता है जब उसके सारे सपने टूट जाते हैं.एक टर्नामेंट के लिए दिल्ली जाने के लिए निकलता है..और संदीप सिंह को अचानक गोली लग जाती है.गोली सीधे उसकी रीढ़ की हड्डी में लगती है जिससे खून बहने और समय पर इलाज ना होने के चलते वो कोमा में चला जाता है और जब उसे होश आता है .
तो उसका कमर के नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो जाता है और डॉक्टर जवाब दे देते हैं कि फ्लिकर सिंह यानि संदीप अब कभी उठ नहीं पाएगा…उधर प्रीतो उसे छोड़कर चली जाती है…आगे क्या होता है ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।बात करें दिलजीत सिंह की एक्टिंग की..तो उन्होंने अपने रोल को बखूबी निभाया संदीप सिंह कीलाइफ को पर्दे पर बड़े ही शानदार तरीके से दिखाया है.तापसी पन्नू भी हरप्रीत के रोल में जमी है.अंगद बेदी सतीश कौशिश सभी ने अपने रोल के साथ न्याय किया है.हां कोच को कुछ ज्यादा ही सख्त दिखाया है.
कुल मिलाकर ये एक अच्छी फिल्म है जिसे आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं लेकिन कमजोर कड़ी यही है कि फिल्म के रूप में ये कुछ खास नहीं कर पाएगी…क्योंकि इसमें एंटरटेनमेंट, एक्शन, ड्रामा और मसाला नहीं है…ये सिर्फ एक साधारण की लव स्टोरी और एक हॉकी प्लेयर के संघर्ष की कहानी है.दो गानों को छोड़कर फिल्म के गानें भी दमदार नहीं है और फिल्म में कोई बड़ा सितारा नहीं है.जो कम ही दर्शकों को पसंद आएगी फिल्म काफी स्लो है जिससे ये उतना असर नहीं छोड पाती लेकिन अगर आप एक सच्चे सूरमा और दिलजीत दोसांझ की बेहतरीन एक्टिंग को पसंद करते हैं और खासतौर पर हॉकी के फैन हैं तो आप सूरमा देखने का प्लान बना सकते हैं.
वेब डेस्क IBC24