UP में BJP ने छोड़ा राम मंदिर मुद्दा, क्या है BJP की नई चाल

आज यूपी के समीकरण में एक बड़े बदलाव पर हम चर्चा करेंगे..... यूपी में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना पैंतरा बदलते हुए नई चाल चली है

: , January 17, 2022 / 11:44 AM IST

आज यूपी के समीकरण में एक बड़े बदलाव पर हम चर्चा करेंगे…..
यूपी में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना पैंतरा बदलते हुए नई चाल चली है…कल तक पार्टी कह रही थी कि योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से उतारकर जातिवादी समीकरण को हिन्दुत्व से पटखनी दी जाएगी…लेकिन अब पार्टी ने योगी को उनके ही अपने घर गोरखपुर से चुनाव में उतारने का फैसला किया है….यानी बीजेपी ने हार्डकोर हिन्दुत्व वाली लाइन को छोड़ने का फैसला किया है….तो इसका क्या मतलब निकाला जाए…चलिए एक एक समीकरण को जरा एक बार फिर से जांच लेते हैं…
कल तक बीजेपी में भगदड़ मची थी… उसके पिछड़े वर्ग के कई नेता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए…इसके बाद बीजेपी की स्थिति कमजोर होती दिख रही थी…पर बीजेपी ने पिछड़ों का विश्वास पाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे करने का फैसला किया है क्योंकि प्रधानमंत्री खुद पिछड़े वर्ग से आते हैं और बीजेपी उनको पिछड़ों का सबसे बड़ा नेता बता रही है…..इसके साथ ही जातिवाद को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने योगी को अयोध्या से उतारने पर विचार किया था पर अब उसने तीन दिनों के मंथन के बाद अपना यह विचार त्याग दिया है…योगी गोरखपुर से ही चुनाव लड़ेंगे..

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योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा से पांच बार सांसद रह चुके हैं… हो सकता है कि बीजेपी को लगता होगा कि विधायकों के भागने पर रोक लगाकर और कुछ समझौते करके वह डैमेज कंट्रोल कर सकती है तो अयोध्या मुद्दे को अभी न भुनाया जाए….बार बार एक ही मुद्दे को भुनाना आसान नहीं होता है इसलिए पार्टी राम मंदिर के मुद्दे को लोकसभा चुनाव के लिए बचाकर रखना चाहती है….अभी इसको यूपी में खपाने की जगह 2024 में पूरे देश में उसका लाभ लिया जाएगा….

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यानी ऐसा लगता है कि बीजेपी अभी हार्डकोर हिन्दुत्व का कार्ड बचाए रखेगी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए….
तो फिर यूपी में अभी क्या होगा….तीन चार दिनों में हालात कुछ फिर से बदल गए हैं….आपको याद होगा दलितों के वोट दिलाने का दावा करने वाले भीम आर्मी के चंद्रशेखर कल तक अखिलेश यादव के साथ गठबंधन के लिए तैयार थे पर आज उनका दांव पलट गया उन्होंने अखिलेश पर दलितों के अपमान का आरोप लगा दिया है और कहा है कि अखिलेश को दलितों का सिर्फ वोट चाहिए… अखिलेश दलितों को गठबंधन में शामिल नहीं करना चाहते हैं…अब आप समझ ही गए होंगे कि योगी- बीजेपी के रास्ते की एक बड़ी झंझट टल गई है… क्योंकि कल तक अखिलेश को सामाजिक न्याय का मसीहा समझ रहे चंद्रशेखर आज कह रहे हैं कि अखिलेश यादव सामाजिक न्याय का मतलब नहीं समझते हैं…. अब जरा याद करें एक दिन पहले योगी ने भी लगभग यही लाइन अखिलेश के लिए कही थी कि वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति करने वाले सामाजिक न्याय की लड़ाई नहीं लड़ सकते… अब भीम आर्मी के मुखिया कह रहे हैं कि अखिलेश सामाजिक न्याय नहीं समझ रहे….क्या इन दोनों वाक्यों में कोई समानता आपको दिख रही है..? क्या आपको याद है कि स्वामी प्रसाद मौर्य समेत बीजेपी छोड़ने वाले सभी नेता कह रहे थे कि बीजेपी पिछड़ों दलितों की उपेक्षा कर रही है… तो क्या समझा जाए अखिलेश पर ऐसे ही आरोप लगाकर कुछ और लोग समाजवादी पार्टी छोड़ेंगे…? जाहिर है बीजेपी बदले की ताक मे लगी होगी…

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खैर तो हम बात करें कि बीजेपी ने हिन्दुत्व के एजेंडे को क्या पीछे कर दिया है…हम ये तो नहीं कहेंगे… पर यह कहा जा सकता है कि इसे जरा पीछे किया है…क्योंकि उसके पास पिछड़े वाले मुद्दे की काट के लिए प्रधानमंत्री का चेहरा है और हिन्दू वोटरों का एक मजबूत आधार भी है…. योगी के साथ ऐसे वोटर अपने आप ही जुड़ जाएंगे…रह गया दलित वोटरों का मुद्दा तो भीम आर्मी की उपेक्षा करके अखिलेश ने वहां बीजेपी को कुछ राहत दी है…पर यह सवाल उठ सकता है कि आखिर अखिलेश ने ऐसा क्यों किया…दो कारण हो सकते हैं एक तो कहा जा रहा है कि चंद्रशेखर उनसे 10 सीटों की डिमांड कर रहे थे और अखिलेश को लगता होगा कि भीम आर्मी अभी इतने सीटों पर लड़ने लायक नहीं है….
दूसरी बात ये हो सकती है कि अपनी बुआ मायावती से अगर अखिलेश को चुनाव के बाद मजबूरी में गठबंधन करना पड़ा तो चंद्रशेखर से दोस्ती बाधा बन सकती है…अभी तक तो यही दिख रहा है कि बसपा चुनाव में भीम आर्मी की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेगी… भीम आर्मी को एक दो सीट मिल जाए तो बहुत है …पर हाल में हुए सर्वे में ये बताया गया है कि बसपा को ज्यादा से ज्यादा 15 सीटें मिलेंगी जबकि समाजवादी पार्टी के 150 से अधिक सीटें जीतने का अनुमान है…ऐसे में अखिलेश यादव एक दो सीट पाने वाली भीम आर्मी के साथ जाकर भला क्या करेंगे…मौका पड़े तो मायावती ज्यादा काम आ सकती हैं…

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तो आप समझ ही गए होंगे कि अखिलेश ने क्यों भीम आर्मी के चंद्रशेखर को किनारे कर दिया है….ये देखा गया है कि लोगों की भीड़ जुटा लेना एक बात है और वोट पा लेना दूसरी बात….. वैसे योगी के गोरखपुर से उतरने की खबर पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि बीजेपी ने बाबा को पहले ही घर भेज दिया है….योगी को गोरखपुर भेजने के बाद अब यूपी जीतने के लिए बीजेपी क्या करेगी…?

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तो पहला तो यही लगता है कि उसने करीब 40 फीसदी विधायकों का टिकट काटने का फैसला किया था उस पर अमल रोका जाए… हमने पहले ही इसकी संभावना जताई थी….लगता है कि अब पार्टी उन्हीं का टिकट काटेगी जिनके जीत की सम्भावना बेहद कम है…खबरें आ रही हैं कि बीजेपी अब 10-15 फीसदी विधायकों का ही टिकट काटेगी और हमें लगता है कि जिनके टिकट कटेंगे उनमें से ज्यादातर के परिवार से या उनकी पसंद के लोगों को ही टिकट दिया जाएगा…परिवारवाद को एकदम से खारिज करना आसान नहीं है…ऐसा करके बीजेपी विधायकों का पलायन रोक सकती है और अपने खिलाफ बन रहे परसेप्शन को ठीक कर सकती है…फिलहाल पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए बीजेपी ने 20 विधायकों का टिकट काटा है….
दूसरा कदम वह अब यह उठा सकती है कि दलितों और पिछड़ों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दे ….तो उसके 107 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में 44 ओबीसी,19 अनुसूचित जाति और 10 महिला उम्मीदवार शामिल हैं. यानी अखिलेश के दलित और पिछड़े कार्ड को कमजोर करने की तैयारी बीजेपी ने कर ली है…बची खुची सहायता उसे अखिलेश से भीम आर्मी का गठबंधन नहीं हो पाने से मिलेगी…
बीजेपी की अगली चुनौती मायावती का दलित वोट बैंक है पर उसमें सेंध लगाने के लिए भीम आर्मी ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर ही दिया है….रह गई कांग्रेस तो बता दें कि प्रियंका गांधी के यूपी में चलाए गए कैम्पेन ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ की पोस्टर गर्ल और
महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष प्रियंका मौर्य ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग OBC से होने के कारण उन्हें टिकट नहीं दिया गया…. उन्होंने प्रियंका गांधी के करीबियों पर टिकट के लिए रिश्वत मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं…. तो यहां कांग्रेस की काट के लिए यह मुद्दा भी बीजेपी के पास है….
कहा जाता है कि यूपी में जाट-मुस्लिम-दलित वोटर मिलकर किसी भी दल का खेल बिगाड़ सकते हैं? तो किसान कानून वापस लेकर बीजेपी ने जाट समुदाय की नाराजगी काफी कम कर दी है….आज तक जो समीकरण दिख रहे उससे लगता है कि बीजेपी को जाट और दलित से खतरा कम हो चुका है….रहा सवाल मुस्लिम वोटरों का तो बीजेपी अब प्रचार कर रही है कि उसके शासन में एक भी दंगा नहीं हुआ है और मुस्लिम भी इससे खुश हैं…हो सकता है इसका कुछ लाभ उसे मिल जाए और फिर मुस्लिम वोट के लिए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AI MIM के आने से दूसरे दलों को भी तो खतरा बढ़ा है…
तो कुल मिलाकर यूपी में रोज रोज नए नए रोचक समीकरण बन रहे हैं और चुनाव तक यह चलता रहेगा…हमारी इस पर नजर रहेगी