MP Farmer Compensation Policy: किसान हित में मोहन सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जमीन अधिग्रहण पर अब मिलेगा इतना ज्यादा मुआवजा, सीएम बोले-किसानों के साथ खड़ी है मध्यप्रदेश सरकार

MP Farmer Compensation Policy: अन्नदाता के कल्याण के लिए संकल्पित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 अप्रैल को अद्भुत-अकल्पनीय और ऐतिहासिक फैसला किया। उन्होंने फैसला किया है कि अब प्रदेश सरकार किसी भी किसान की जमीन लेने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना भुगतान करेगी।

MP Farmer Compensation Policy: किसान हित में मोहन सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जमीन अधिग्रहण पर अब मिलेगा इतना ज्यादा मुआवजा, सीएम बोले-किसानों के साथ खड़ी है मध्यप्रदेश सरकार

mohan yadav news/ image source: ibc24

Modified Date: April 22, 2026 / 11:50 pm IST
Published Date: April 22, 2026 11:50 pm IST
HIGHLIGHTS
  • किसानों को मिलेगा चार गुना मुआवजा
  • भूमि अधिग्रहण नीति में बड़ा बदलाव
  • विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

MP Farmer Compensation Policy:  भोपाल। अन्नदाता के कल्याण के लिए संकल्पित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 अप्रैल को अद्भुत-अकल्पनीय और ऐतिहासिक फैसला किया। उन्होंने फैसला किया है कि अब प्रदेश सरकार किसी भी किसान की जमीन लेने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना भुगतान करेगी। यानी, किसान को भू-अर्जन की जाने वाली भूमि का 4 गुना मुआवजा मिलेगा। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भू-अर्जन मुआवजे का फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया। इस निर्णय से अब किसानों को उनकी भूमि का वाजिब मूल्य और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिलेगा। प्रदेश में परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी, विकास को तेज रफ्तार मिलेगी और किसान भी समृद्ध होंगे।  जमीन अधीग्रहण पर मिलेगा 4 गुना ज्यादा मुआवजा,

पहले नहीं मिलता था वाजिब दाम

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को बताया कि वर्ष 2014 में प्रदेश में फैक्टर-1 निर्धारित किया गया था। इसके तहत किसानों को गाइडलाइन दर का दोगुना मुआवजा दिया जाने लगा। अधिनियम में तय दर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से लागू होती थी। चूंकि, व्यवहारिक दृष्टि से जमीन की गाइडलाइन दर कम होने के कारण किसानों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था, जबकि विकास परियोजनाओं की गति तेज हो रही थी। इस वजह से सरकार ने इस दोगुना मुआवजे को बढ़ाकर 4 गुना कर दिया। यह निर्णय भू-अर्जन परियोजनाओं पर लागू होगा। इस निर्णय का सीधा सकारात्मक प्रभाव सिंचाई परियोजनाओं, नई सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों और बांधों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण अधोसंरचना कार्यों पर पड़ेगा। विशेष रूप से, यह लाभ उन सभी लंबित प्रकरणों में भी दिया जाएगा जहाँ आज तक अंतिम अवॉर्ड पारित नहीं किया गया है।
राज्य सरकार ने इस बदलाव के लिए जिस अधिनियम का उपयोग किया उसे मध्य प्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 कहते हैं। संक्षेप में इसे भू-अर्जन अधिनियम-2013 भी कहा जाता है। इसमें धारा 26 के अंतर्गत भूमि के मूल्य निर्धारण के सिद्धांत निर्धारित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उचित प्रतिकर सुनिश्चित करना है। इसके अलावा इसके जरिये पारदर्शिता एवं पुनर्वास की व्यवस्था भी की जाती है।

इसलिए जरूरी था संशोधन

किसानों का कल्याण मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहली प्राथमिकता है। ऐसे में किसानों को उनकी भूमि का सही दाम मिल सके, इसलिए राज्य सरकार ने अधिनियम में संशोधन करने का निर्णय लिया। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 नवंबर 2025 को संशोधन के निर्देश भी दिए थे। चूंकि हर साल प्रदेश में अनुमानित रूप से 70,000–75,000 करोड़ रुपयों का पूंजी निवेश सड़क, पुल, रेलवे लाइन, राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई परियोजनाओं, अधोसंरचना विकास के लिए किया जाता है। इस बदलाव के बाद अब प्रदेश में विकास कार्य तेज गति से होंगे।

समिति बनाकर किया वास्तविकता का अध्ययन

किसानों के जीवन में यह बदलाव करने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया। लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री चैतन्य कश्यप और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट इसके सदस्य बनाए गए। इस समिति की पहली बैठक 21 जनवरी को हुई। इस बैठक में मंत्रियों-विधायकों के अलावा फिक्की, क्रेडाई, सीआईआई, किसान संघ और कृषक प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सभी ने इस बात की अनुशंसा की, कि फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 किया जाए।

अब इतना होगा मुआवजा

गौरतलब है कि, लोक निर्माण विभाग पिछले 3 वर्षों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये मुआवजा दे चुका है। नई व्यवस्था में यह करीब 20 हजार करोड़ रुपये होगा, जो सीधे किसानों के खातों में जमा होगा। पिछले तीन वर्षों में जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास द्वारा 4500 हेक्टेयर जमीन का भू-अर्जन किया गया। इसके लिए 1 हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था में यह राशि दोगुनी होगी।

विकास परियोजनाओं-किसान हित के बीच का संतुलन

सीएम डॉ. मोहन यादव का मानना है कि किसानों को 4 गुना मुआवजा देना केवल निर्णय नहीं है, यह किसान सम्मान का संकल्प है। किसान हित सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार चाहती है कि विकास और किसान हित साथ-साथ आगे बढ़ें। सीएम डॉ. यादव ने कहा है कि हमारी सरकार किसानों के सम्मान, अधिकार और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय विकास परियोजनाओं और किसान हित, दोनों के बीच संतुलन स्थापित करेगा।

किसान कल्याण के लिए संकल्पित सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि विकास को लेकर आगे बढ़ना है तो भूमि अधिग्रहण पर बड़े फैसले लेने होंगे। हम विकास में किसानों को सहभागी बना रहे हैं। कई पुराने प्रोजेक्ट हैं जो वर्षों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन भूमि की वजह से पूरे नहीं हो पाए। अब हमने इसका हल निकाला है। उन्होंने कहा कि हमने सरल नियम इसीलिए बनाए हैं ताकि मामले लंबित न रहें। हमारी गाइडलाइन कम होती है, बाजार की अधिक तो यह काफी लोगों को असंगत लगता है। हमारी सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी है। सरकार ने किसानों को बोनस भी बढ़ाकर दिया है। पिछले साल का गेहूं अभी भी गोदामों में भरा है। इसके बावजूद हम इसे खरीद रहे हैं। भूमि अधिग्रहण में बड़ा विवाद मुआवजे का होता है, यह निर्णय लेकर हमने विकास के रास्ते खोले हैं।

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लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।