Reported By: Vijendra Pandey
,Twisha Sharma Death Case Update / Image Source : FILE
जबलपुर: Twisha Sharma Death Case Update बहुचर्चित त्विषा डैथ केस में जबलपुर हाई कोर्ट (HC) से गिरिबाला सिंह को बहुत बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को ट्रायल अदालत से मिली अग्रिम जमानत को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद अब गिरिबाला सिंह को जेल जाना होगा।
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत की राहत दी थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। Giribala Singh Anticipatory Bail Cancelled इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने देर रात अपना आदेश जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर छह एंटीमॉर्टम चोटें पाई गईं, जिनमें सिर और हाथों पर चोटें शामिल थीं। AIIMS की क्वेरी रिपोर्ट में ये स्पष्ट किया गया कि चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी की, वो ये कि मृतका और आरोपी एक ही घर में रह रहे थे और मृतका के शरीर पर चोटों के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
आपको बता दें की जबलपुर हाई कोर्ट में कल त्विषा शर्मा डेथ केस को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हाई कोर्ट कल दोपहर 2:30 बजे आरोपी सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई । मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि गिरिबाला सिंह ने जमानत की शर्तों का लगातार उल्लंघन किया है और जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।
Twisha Sharma Death Case: सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने दलील दी कि जिला अदालत ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए जल्दबाजी में गिरिबाला सिंह को जमानत दे दी। उन्होंने अदालत को बताया कि अग्रिम जमानत मिलने से पहले और बाद में भी गिरिबाला सिंह ने जांच एजेंसी के नोटिसों का जवाब नहीं दिया और लगातार जांच से बचने की कोशिश करती रहीं।
महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मृतिका त्विषा शर्मा की छवि खराब करने और उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया। यह जमानत की शर्तों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह प्रॉसिक्यूशन के साथ “लुका-छिपी का खेल” खेल रही हैं और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि जांच एजेंसी द्वारा गिरिबाला सिंह को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने नोटिस तक तामील नहीं होने दिए। महाधिवक्ता ने कहा कि आरोपी का रवैया जांच में सहयोग करने वाला नहीं रहा और लगातार जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की गई।