CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing: क्या अब घर बैठे होगी कोर्ट की सुनवाई? CJI सूर्यकांत ने ऑनलाइन हियरिंग पर कही ये बड़ी बात, जानिए आप भी..
CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वर्चुवल सुनवाई की मांग पर बड़ा फैसला लिया है।
CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing/Image: AI Generated
- वर्चुअल सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई
- CJI सूर्यकांत ने कहा- अभी ऐसा आदेश जारी करना उचित नहीं
- कैदियों की ऑनलाइन पेशी और ईंधन बचत पर भी कोर्ट में चर्चा
CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आज (27 मई बुधवार) को वर्चुवल सुनवाई की मांग पर बड़ा फैसला लिया है, CJI ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती गर्मी और लू के चलते इस पर कोई आदेश जारी नहीं कर सकते। दरअसल, याचिकाकर्ता वकील ने अर्जी में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court hearing update) से देशभर की अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई करने का आदेश पारित करने की याचिका दायर की थी ताकि मौजूदा समाया में चल रहे ईंधन संकट से निपटा जा सके। कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने कहा, दिल्ली का तापमान 50 डिग्री तक पहुंच रहा है, ऐसे में वरिष्ठ सदस्यों के लिए वर्चुवल सुनवाई सबसे अच्छा तरीका है। लेकिन इस तरह का आदेश जारी नहीं कर सकते।
ऐसा आदेश जारी करना उचित नहीं
CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing इसके बाद CJI ने एक आदेश जारी करते हुए लिखा कि, हम वर्चुअल सुनवाई की मांग वाली याचिका की सराहना करते है, लेकिन कोर्ट के लिए ऐसा आदेश जारी करना उचित नहीं होगा। CJI ने कहा कि हम कोई निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं लेकिन हमारे दो प्रशासनिक सर्कुलर के माध्यम से एक विनम्र अपील की गई है, और हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो कोर्ट की कार्यवाही में ऑनलाइन शामिल होने का फैसला करते हैं।
CJI ने पूछा खास उदाहरण
इस दौरान याचिकाकर्ता वकील ने CJI (CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing) से कहा, सभी जेलों से हर दिन लगभग 230 बसें कैदियों को कोर्ट की सुनवाई में शामिल होने के लिए लाती हैं। उन्हें वर्चुअल सुनवाई के ज़रिए पेश करें, तो इससे बहुत बचत होगी। इस पर CJI ने पूछा कि क्या आप कोई खास उदाहरण दे सकते हैं?
डेटा की जाँच करेंगे फिर कोई फ़ैसला लेंगे : CJI
CJI Surya Kant On SC Virtual Hearing इसके जवाब में वकील ने कहा, माई लॉर्ड, 14 दिन की न्यायिक हिरासत के मामलों में, जब भी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का मामला आता है, तो कैदियों को हर बार अदालत में पेश होना पड़ता है। माई लॉर्ड, अगर तीन महीने के लिए यह निर्देश दिया जाए कि उन्हें शारीरिक रूप से पेश न किया जाए, तो बहुत बचत हो सकती है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, हम डेटा की जाँच करेंगे फिर कोई फ़ैसला लेंगे।
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