देखिए गंधवानी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए गंधवानी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

देखिए गंधवानी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड
Modified Date: November 29, 2022 / 08:42 pm IST
Published Date: October 2, 2018 8:42 am IST

धार। विधायक जी का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने हम पहुंचे हैं। गंधवानी विधानसभा धार जिले में आने वाली गंधवानी 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई पिछले 10 साल से यहां प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रह चुकी जमुनादेवी के भतीजे उमंग सिंघार विधायक हैं..और सत्ताधारी बीजेपी को यहां पहली जीत का इंतजार है। जाहिर है आगामी चुनाव में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वो कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार को हैट्रिक लगाने से रोके। 

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धार ज़िले का गंधवानी विधानसभा क्षेत्र ये सीट कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाना जाता है । जब से मध्यप्रदेश विधान सभा का गठन हुआ है,तभी से यहां कांग्रेस का दबदबा रहा है । गंधवानी विधानसभा से कांग्रेस के विधायक हैं उमंग सिंघार..जो प्रदेश की उप मुख्यमंत्री रह चुकीं जमुनादेवी के भतीजे हैं । उमंग बीते दो बार से भील आदिवासियों के बूते चुनाव जीतते आ रहे हैं । साल 2008 में उमंग सिंघार और भाजपा से सांसद रहे छतरसिंह दरबार आमने-सामने थे, लेकिन उमंग ने उन्हें परास्त कर यहां कांग्रेस को मजबूती से खड़ा किया है। इसके बाद साल 2013 में बीजेपी से सरदार मेड़ा को 12 हज़ार के अंतर से हरा कर उमंग ने दूसरी बार कांग्रेस का परचम लहराया । अगर प्रतिशत में बात की जाए तो दो बार से सत्ता पर काबिज कांग्रेस को 2008 में 63.26 प्रतिशत वोट मिले थे,जो 2013 में घटकर 55.44 फीसदी रह गया । इसी तरह बीजेपी को 2008 में 35.64 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि 2013 में उसे 44.32 प्रतिशत वोट मिले । गंधवानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता आदिवासी समाज से हैं। यहां पर आदिवासी समाज में दो जातियों के लोग निवास करते हैं। जिसमे 60 प्रतिशत भील आदिवासी हैं तो वहीं 40 प्रतिशत भिलाला समुदाय से हैं..भील समाज के वोटरों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। इसलिए यहां अधिकतर भील समाज का प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में उतारा जाता है और यही वजह रही है कि दो बार से इसी जाति के उमंग सिंघार चुनाव जीतते आए हैं । 

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भौगोलिक दृष्टिकोण से क्षेत्र के रास्ते काफी घुमावदार और इलाका पहाड़ी है। विधानसभा सीट का क्षेत्रफल अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी बड़ा है, इसलिए प्रत्याशियों को अधिक मेहनत और जनसंपर्क करना पड़ता है। गंधवानी में तीन विकासखंड है जिनमें गंधवानी, बाग और तिरला शामिल है । यहां करीब सवा दो लाख मतदाता हैं । गंधवानी में बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ते क्रम में है पार्टी ने अपना जनाधार मजबूत करने की पूरी कोशिश भी की है। पर असल सवाल यही है कि क्या बीजेपी कांग्रेस के इस गढ़ में इस बार सेंध लगा पाएगी?  वैसे तो गंधवानी विधानसभा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। मुद्दों की बात की जाए तो आने वाले चुनाव में यहां बेरोजगारी का मुद्दा सबसे बड़ा सियासी मुद्दा होगा। वहीं बिजली, पानी, सड़कों की कमी से तो यहां के लोग जूझ ही रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। ऐसे में कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार के लिए मिशन 2018 की जंग इतनी आसान नहीं रहने वाली

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2008 में अस्तित्व में आने के बाद से गंधवानी में कांग्रेस काबिज हैं और यहां की जनता लगातार दो बार से उमंग सिंगार को अपना नेता चुनती आ रही है.. लेकिन इन दस सालों के दौरान कांग्रेस विधायक की उपलब्धियों की बात करें तो। कुछ खास नजर नहीं आता।  यहां विकास की रफ्तार आज भी सुस्त  है। बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा  और रोजगार के मोर्चे पर यहां विधायक की उपलब्धि कुछ खास नहीं रही है। जिसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। जाहिर है आने वाले चुनाव में विधायक जी को ये गुस्सा भारी पड़ सकता है।

आने वाले चनाव जिन मुद्दों का गूंजना तय है उसमें सबसे बड़ा मुद्दा सड़कों की बदहाली का है। वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था भी चरमरा गई है। अस्पतालों में यहां महिला डॉक्टरों की कमी की वजह से महिला मरीजों को काफी दिक्कत होती है। इसके अलावा युवाओं के लिए ना ही रोजगार के अवसर है और ना ही पढ़ने के लिए उचित संसाधन। हालत ये है की गंधवानी से युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। यहां रहने वाले लोगों तक ना तो बिजली पहुंच पा रही है ना ही पानी।  आदिवासियों ने यहां के विधायक के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।  चुनावी साल है तो बीजेपी जहां विधायक को घेरने में जुट गई है। वहीं कांग्रेस विधायक काम ना होने का ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ते हैं। 

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है गंधवानी में नेताओं में एक दूसरे को दोषी ठहराने की होड़ सी लगी है जनता के सामने खुद को हितैषी और विरोधी को खलनायक साबित करने की पुरजोर कोशिश जारी है । गंधवानी में बीजेपी और कांग्रेस  के बीच हमेशा ही कड़ी टक्कर रही है और इस बार भी आसार नजदीकी मुकाबले के ही बन रहे हैं लेकिन चुनाव में जाने से पहले पार्टियों को अपनी अंदरूनी सियासत से भी पार पाना होगा। दोनों दलों में टिकट के लेकर घमासान मचना तय है। कांग्रेस में दो बार के विधायक उमंग सिंघार हैट्रिक लगाने के लिए तैयार हैं। लेकिन 2018 के चुनाव में कांग्रेस वधायक के लिए मुश्किलें बढ़ी है। क्योंकि इस क्षेत्र में बीजेपी के साथ ही जयस भी अपना प्रत्याशी उतार रहा है।

गंधवानी में पिछले दो बार से कांग्रेस के उमंग सिंघार जीतते आ रहे है। उमंग कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के भी काफी नजदीकी माने जाते है। सीटिंग एमएलए होने के नाते आगामी चुनाव में वो टिकट के स्वाभाविक दावेदार हैं। लेकिन गंधवानी में उनके खुद की पार्टी के लोग ही  उनके लिए परेशानियां बढ़ा रहे हैं गुटबाज़ी का आलम ये है कि अब यहां स्थानीय प्रत्याशी को उतारने की मांग तक पार्टी हाई कमान से की गई है। कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह मंडलोई ने मौजूदा विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और विधायक के ऊपर लोगों को धमकाने का आरोप भी लगाया। कांग्रेस में उमंग सिंघार के बाद अगर कोई दावेदार मजबूत लग रहा है तो वो आदिवासी का लोकप्रिय चेहरा मंडलोई ही है।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी में भी टिकट दावेदारों की रेस लम्बी है।  क्योंकि गंधवानी में अभी भी बीजेपी अपनी ज़मीन तलाश रही है। कई नेता दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी में भितरघात की आशंका बनी हुई है। इस लिस्ट में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती मोहन पटेल का नाम सबसे आगे है। वहीं पिछले चुनाव में उमंग सिंघार के सामने हारे सरदार सिंह मेड़ा भी रेस में है।  बीजेपी में एक ओर नाम सामने आ रहा है वो है करन सिंह रावत का। इनकी पकड़ आदिवासियो में अच्छी मानी जाती है।  इस स्थिति में बीजेपी के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है।  बीजेपी और कांग्रेस को चुनौती देने के लिए इस बार मैदान में जयस यानि आदिवासी युवा शक्ति भी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी दावेदारी मजबूत करते दिख रही है। जयस ने दावा किया है की वो अपने 80 प्रत्याशी आदिवासी बहुल क्षेत्र में मैदान में उतारेगी।  जाहिर है गंधवानी में इस बार मिशन 2018 की जंग इतनी आसान नहीं होगी। बीजेपी और कांग्रेस के अलावा यहां जयस भी चुनावी ताल ठोंकने के लिए तैयार है और तीनों की नजर इस बार आदिवासी वोटर्स पर है जो यहां निर्णायक भूमिका में हैं। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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