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Chhatarpur Father Son Viral Video: छतरपुर: मध्यप्रदेश के छतरपुर से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। इस खबर के आने के बाद से जिले भर में हड़कंप मच गया है। दरअसल, एम्बुलेंस समय पर नहीं मिल सकी, इसलिए बेटा संतोष विश्वकर्मा अपने बीमार पिता को लोडर वाहन में डालकर अस्पताल ले जा रहा था। रास्ते भर वह उन्हें संभालता रहा, उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचते ही इलाज मिल जाएगा। लेकिन सफर ही जिंदगी और मौत की दौड़ बन गया। इलाज से पहले ही पिता ने बेटे की बाहों में दम तोड़ दिया।एक मजबूर बेटे और लाचार व्यवस्था की यह दर्दनाक कहानी दिल को झकझोर देती है। चलिए विस्तार से बताते हैं पूरा मामला क्या है।
“पापा… आंखें खोलिए पापा, प्लीज़ पापा”
एक बेटा अपने बीमार बाप को लेकर भागे जा रहा है. बेटा अपने बाप को बचाने के लिए हालत से लड़ रहा है. एम्बुलेंस नहीं मिली तो लोडर वाहन से अस्पताल ले जा रहा है. ये कैसे भी अपने बाप को बचाना चाह रहा है. लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था.
तभी तो… pic.twitter.com/pWfktbD5MF
— Priya singh (@priyarajputlive) February 27, 2026
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से दिल दहला देने वाला Chhatarpur Father Son Viral Video सामने आया है, जहां बेटे की आंखों के सामने पिता ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। हार्ट अटैक से पीड़ित 65 वर्षीय जगदीश विश्वकर्मा को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल सकी, जिसके कारण बेटे संतोष विश्वकर्मा उन्हें लोडर वाहन से अस्पताल ले जा रहा था। रास्ते में भीषण ट्रैफिक जाम में गाड़ी फंस गई, तो बेटे ने चलती गाड़ी में ही पिता को सीपीआर देना शुरू कर दिया। वह लगातार छाती दबाते हुए उन्हें पुकारता रहा-“पापा, आंखें खोलिए…” लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस दर्दनाक कोशिश का वीडियो भी सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
जानकारी के मुताबिक जगदीश विश्वकर्मा राजनगर थाना क्षेत्र के तालगांव के निवासी थे और बेटे के साथ छतरपुर जा रहे थे, तभी ग्राम बरकोंहा के पास अचानक सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई। हालत बिगड़ती देख बेटे ने एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन वाहन नहीं पहुंचा। मजबूरन लोडर वाहन से अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही संतोष ने पिता को गोद में उठाकर अंदर दौड़ लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक माना गया, हालांकि परिजन पोस्टमॉर्टम कराए बिना ही शव घर ले गए। परिवार में पांच बहन-भाइयों में संतोष इकलौता बेटा है और तीन बहनें अभी अविवाहित हैं, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इस घटना ने प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि “900 करोड़ रुपए की एम्बुलेंस आखिर किस ग्रह पर चल रही हैं?” उन्होंने कहा कि यदि समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो शायद एक परिवार का सहारा बच सकता था। छतरपुर की यह घटना न सिर्फ एक बेटे की बेबसी की कहानी है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करती है।