Reported By: Jitendra Kumar Goutam
,Damoh Fake Doctor/Image Credit: AI Generated
Damoh Fake Doctor: दमोह में मिशन अस्पताल मामले के बाद एक बार फिर फर्जी डॉक्टरों के खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार मामला शहर के निजी संजीवनी अस्पताल से जुड़ा है, जहां फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे दो कथित डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन में की गई कार्रवाई में डॉ. कुमार सचिन यादव निवासी ग्वालियर और डॉ. राजपाल गौर निवासी सीहोर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं डॉ. अजय मौर्य निवासी मुरैना हाल जबलपुर को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने फर्जी MBBS डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए संजीवनी अस्पताल में नौकरी हासिल की थी और करीब एक वर्ष से मरीजों का इलाज कर रहे थे। सीएमएचओ कार्यालय की जांच रिपोर्ट के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 479/26 एवं 480/26 दर्ज कर कार्रवाई की। पुलिस पूछताछ में फर्जी डिग्री और डॉक्टर रजिस्ट्रेशन तैयार कर निजी अस्पतालों में नियुक्तियां कराने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में कई और संदिग्ध नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दमोह के मिशन अस्पताल में कथित फर्जी डॉक्टर एन केम जॉन का मामला सामने आया था, जहां हृदय रोग सर्जरी के दौरान कई मरीजों की मौत का आरोप लगा था। उस मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। अब एक बार फिर फर्जी डॉक्टरों के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया और निजी अस्पतालों की भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर कैसे फर्जी डिग्रीधारी लोग डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहते हैं और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगती। वही इस मामले में पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।