‘ईज ऑफ जस्टिस’ को शासन की अहम प्राथमिकता के रूप में देख रहा भारत: कानून मंत्री मेघवाल

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‘ईज ऑफ जस्टिस’ को शासन की अहम प्राथमिकता के रूप में देख रहा भारत: कानून मंत्री मेघवाल

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 05:33 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 05:33 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), आठ अगस्त (भाषा) केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शनिवार को कहा कि भारत इंसाफ तक जनता की आसान पहुंच (ईज ऑफ जस्टिस) को शासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता मानते हुए न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती, पारदर्शी, प्रभावी और समावेशी बनाने पर जोर दे रहा है।

मेघवाल ने इंदौर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के पश्चिमी जोन के क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा,‘‘आज भारत ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को शासन की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में देख रहा है। जिस प्रकार हमने ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को राष्ट्रीय अभियान बनाया, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था को भी अधिक सुलभ, किफायती, पारदर्शी, प्रभावी और समावेशी बनाना हम सबका साझा उद्देश्य है।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी लोगों का साझा संवैधानिक दायित्व है।

कानून मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उन्नति से नहीं होगा।

उन्होंने कहा,‘‘विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश के प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार और समय पर न्याय प्राप्त होगा।’’ मेघवाल ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान देश में न्यायिक सुधारों की यात्रा केवल कानूनी बदलावों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्थागत मजबूती, विवादों के वैकल्पिक समाधान, नागरिक-केंद्रित शासन और न्याय प्रदान करने वाली प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था शामिल है।

उन्होंने कहा,‘‘जब कानून आम नागरिकों की भाषा में बोलता है, तब न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत हो जाता है।’’

कानून मंत्री ने कहा कि ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में मशहूर भारत में परिवार, समाज और ग्राम पंचायतों में बातचीत के जरिये विवादों के समाधान तलाशने की परंपरा रही है और यही परंपरा आधुनिक दौर में मध्यस्थता (मीडिएशन) के रूप में विश्व भर में स्वीकार की जा रही है।

भाषा हर्ष जितेंद्र

जितेंद्र