इंदौर पेयजल त्रासदी: उच्च न्यायालय से जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का अनुरोध, अर्जी दायर

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इंदौर पेयजल त्रासदी: उच्च न्यायालय से जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का अनुरोध, अर्जी दायर

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  • Publish Date - August 29, 2026 / 08:21 PM IST,
    Updated On - August 29, 2026 / 08:21 PM IST

इंदौर, 29 अगस्त (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की ओर से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में पेश रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए दो याचिकाकर्ताओं ने शनिवार को अदालत में अलग-अलग आवेदन दायर किए।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ‘व्यापक जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही’ सुनिश्चित करने के लिए इस रिपोर्ट का सार्वजनिक होना जरूरी है।

उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाले एक सदस्यीय आयोग ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत की जांच के बाद अदालत में लगभग 600 पृष्ठों की रिपोर्ट पेश की है। यह आयोग उच्च न्यायालय के आदेश पर 27 जनवरी को गठित किया गया था।

मामले के याचिकर्ताओं में शामिल रितेश इनानी ने संवाददाताओं को बताया,‘‘हमने उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक अदालत के एक कार्यालय में जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया है। हालांकि, रिपोर्ट को प्रथमदृष्टया देखने से अभी तय नहीं किया जा सकता कि कौन व्यक्ति दोषी है और कौन निर्दोष।’’

उच्च न्यायालय के वकील ईनानी ने बताया कि उन्होंने अदालत में अर्जी दायर करके गुहार की है कि सभी पक्षकारों को रिपोर्ट की एक-एक प्रति उपलब्ध कराई जाए और व्यापक जनहित में इसे सार्वजनिक किया जाए।

उन्होंने कहा,‘‘दूषित पेयजल की समस्या केवल इंदौर की नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की है। हम अदालत से अनुरोध करते हैं कि जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के संबंध में समूचे राज्य के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।’’

मामले के एक अन्य याचिकाकर्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी की ओर से भी उच्च न्यायालय में आवेदन दायर किया गया है।

द्विवेदी के वकील मनीष यादव ने बताया कि इस आवेदन में जांच आयोग की रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराने और व्यापक जनहित, पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट के प्रकाशन या इसे सार्वजनिक किए जाने की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। मामले में आठ सितंबर को अगली सुनवाई होनी है।

उच्च न्यायालय ने न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट के बारे में 25 अगस्त को व्यवस्था दी थी कि इस मामले में मौजूदा पड़ाव पर जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा था,‘‘इस पड़ाव पर रिपोर्ट सार्वजनिक न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान मामलों में वकालतनामा दाखिल करने वाले अधिवक्ता प्रधान रजिस्ट्रार के कार्यालय में जाकर रिपोर्ट देख सकते हैं और इस रिपोर्ट के अंश नोट भी कर सकते हैं।’’

भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 के दौरान दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण उल्टी-दस्त का प्रकोप फैलने के बाद कई लोगों की मौत हो गई थी।

स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की जान गई।

हालांकि, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई थी और हर मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।

भाषा हर्ष

संतोष

संतोष