जबलपुर: Jabalpur News: जबलपुर में एक बार फिर IBC 24 की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है जहां सरकारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रह रहे क़ब्जाधारियों से ज़मीन खाली करवाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हटा दिया है। मझौली ब्लॉक के मुड़कुरू गांव में संदिग्ध क़ब्जाधारी लंबे समय से सरकारी ज़मीन पर डेरा जमाए हुए थे। साथ ही कुछ स्थानीय मददगारों के सहयोग से क़ब्जाधारियों ने स्थानीय पंचायत के दस्तावेज़ भी बनवा लिए थे।
Jabalpur News: क़ब्जाधारियों को हटाने के बाद अब पुलिस और प्रशासन की टीम संबंधित दस्तावेज़ों की जांच में जुट गई है कि आख़िर किस आधार पर क़ब्जाधारियों ने पंचायत के कागज़ात बनवाए थे। वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ-साथ कुछ लोगों के बैंक खाते भी पाए गए हैं जिनकी जांच के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गठित की गई है। बता दें कि मुड़कुरू गांव में सरकारी ज़मीन पर क़ब्ज़े की जानकारी लगने पर IBC 24 की टीम ने ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर मौके का जायज़ा लिया और खबर को प्रमुखता से दिखाया जिससे प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ।
Jabalpur News: साथ ही क़ब्जाधारियों के संदिग्ध और बाहरी होने की आशंका भी जताई गई थी जिसके बाद हिंदू संगठनों ने भी जांच की मांग की थी। IBC 24 की खबर को संज्ञान में लेते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की जिसमें क़ब्जाधारी संदिग्ध पाए गए। इसके बाद प्रशासन ने क़ब्जाधारियों को ज़मीन से हटाकर दस्तावेज़ों की जांच शुरू कर दी है।
जबलपुर सरकारी जमीन कब्जा मामले में "प्रशासन की कार्रवाई" कब हुई?
प्रशासन की कार्रवाई IBC 24 की खबर के बाद तेज़ हुई और मझौली ब्लॉक के मुड़कुरू गांव में कब्जाधारियों को हाल ही में ज़मीन से हटाया गया।
क्या "कब्जाधारियों के दस्तावेज़" भी फर्जी पाए गए हैं?
हां, जांच में पाया गया है कि कुछ संदिग्ध कब्जाधारियों ने स्थानीय पंचायत से फर्जी दस्तावेज़ जैसे वोटर ID, आधार कार्ड और बैंक खाते बनवा लिए थे, जिसकी तहसीलदार के नेतृत्व में जांच जारी है।
"सरकारी जमीन कब्जा" करने वालों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
फिलहाल उन्हें ज़मीन से हटा दिया गया है और दस्तावेज़ों की वैधता की जांच हो रही है। जांच पूरी होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या यह "IBC 24 की खबर का असर" माना जा रहा है?
जी हां, यह प्रशासन द्वारा स्वीकार किया गया है कि IBC 24 की रिपोर्टिंग के बाद ही मामले पर संज्ञान लिया गया और कार्रवाई शुरू हुई।
क्या "हिंदू संगठनों ने भी जांच की मांग" की थी?
हां, संदिग्ध कब्जाधारियों के बाहरी होने की आशंका को लेकर हिंदू संगठनों ने भी जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।