MP OBC Reservation: अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलेगा 27 प्रतिशत आरक्षण? कल इतने बजे होगी फाइनल हियरिंग, चीफ जस्टिस बोले-मामले की गंभीरता…

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MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई ने रफ्तार पकड़ ली है।

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 07:24 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 09:57 PM IST

obc reservation/ image osurce: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 14 से 27% आरक्षण विवाद
  • 50% सीमा पार होने पर विवाद
  • हाईकोर्ट ने लगाई रोक

MP OBC Reservation: एमपी में 7 सालों से कानूनी लड़ाई में उलझे 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण पर फैसले की घड़ी पास आ गई है। सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देशों पर जबलपुर हाईकोर्ट ने आज से मामले पर फायनल हियरिंग शुरु कर दी है। चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की डिवीज़न बैंच ने ओबीसी आरक्षण पर लंबित 86 याचिकाओं को 2 बैच में बांटने के निर्देश दिए हैं। इसमें एक बैच 27 फीसदी आरश्रण के पक्ष का और दूसरा विपक्ष का होगा। कोर्ट ने कल 11 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक मामले पर सुनवाई जारी रखऩा तय किया है।

हाईकोर्ट सबसे पहले ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का विरोध करने वालों की दलील सुनेगा। आरक्षण बढ़ाने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट प्रदीप संचेती और एमपी हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आदित्य सांघी पक्ष रखेंगे। इसके बाद हाईकोर्ट राज्य सरकार को सुनेगा, जिसका पक्ष देश के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज रखेंगे। सोमवार को हाईकोर्ट के बैठने का समय खत्म होने के बाद भी आधे घण्टे से ज्यादा वक्त तक इस मुद्दे पर सुनवाई की गई। इस दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से कहा गया कि ओबीसी समुदाय बीते 7 सालों से फैसले का इंतज़ार कर रहा है। वहीं ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के विरोधियों की ओर से भी जल्द फैसले की मांग की गई। कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण को डिसाईड करने के लिए 3 माह का वक्त दिया था जिसमें से डेढ़ माह का वक्त गुज़र चुका है। इस बीच हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वो मामले की गंभीरता को समझते हैं और इसीलिए इस मुद्दे पर फायनल हियरिंग शुरु कर रहे हैं।

OBC Reservation: यह है पूरा मामला

मध्य प्रदेश में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण का मुद्दा पिछले कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। राज्य में पहले ओबीसी के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण लागू था, लेकिन साल 2019 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी को मिलाकर कुल आरक्षण करीब 63 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है। इसी आधार पर इस निर्णय को जबलपुर हाईकोर्ट में कई याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई, जिसके बाद अदालत ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी। तब से यह मामला लगातार न्यायालय में लंबित है और अब इसकी अंतिम सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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