इंदौर (मध्यप्रदेश), छह जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत इंदौर में जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कवायद शुरू हो गई है तथा प्रस्तावित परियोजना के तहत देश के सबसे स्वच्छ शहर में पेयजल की गुणवत्ता की वास्तविक समय में निगरानी एवं अन्य उपाय किए जाएंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
यह कवायद ऐसे समय की जा रही है, जब शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 में दूषित पेयजल की आपूर्ति के बाद हुई कई लोगों की मौत के मामले की न्यायिक जांच चल रही है।
इंदौर के लोकसभा सदस्य शंकर लालवानी ने बताया कि ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत प्रस्तावित परियोजना के जरिये पेयजल में क्लोरीन के स्तर, पानी की शुद्धता और अन्य गुणवत्ता मानकों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तत्काल अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था एक केंद्रीकृत नियंत्रण सुविधा से जुड़ी रहेगी जिससे शहर के प्रत्येक क्षेत्र की जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध होगी।
लालवानी ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ बैठक करके शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को आगामी 20 वर्षों की जरूरतों के अनुरूप सुदृढ़ एवं विस्तारित करने संबंधी प्रस्तावित परियोजना की समीक्षा की।
सांसद ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत शहर की पुरानी पाइपलाइनें बदली जाएंगी, नये क्षेत्रों में जलापूर्ति नेटवर्क का विस्तार होगा, जरूरत वाले इलाकों में बड़ी पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी और जलदाब की निगरानी की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि एक लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय बजट वाले ‘अर्बन चैलेंज फंड’ का उद्देश्य शहरों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक अनुदान-आधारित मॉडल से अलग इस फंड के तहत कुल परियोजना लागत का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देती है, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत निवेश शहरों को बाजार ऋण, बैंक ऋण या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से जुटाना होता है। शेष राशि राज्य सरकारों, शहरी निकायों या अन्य स्रोतों से जुटाई जाती है।
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राजकुमार
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