IBC24 Special Report: जहां 10 लाख बच्चे कुपोषित.. वहां नदी बहाए गए 11 हजार लीटर दूध! आस्था और सरोकार के बीच छिड़ी नई बहस, देखें IBC24 की ये खास रिपोर्ट

जहां 10 लाख बच्चे कुपोषित.. वहां नदी बहाए गए 11 हजार लीटर दूध! आस्था और सरोकार के बीच छिड़ी नई बहस, Milk poured into Narmada River

IBC24 Special Report: जहां 10 लाख बच्चे कुपोषित.. वहां नदी बहाए गए 11 हजार लीटर दूध! आस्था और सरोकार के बीच छिड़ी नई बहस, देखें IBC24 की ये खास रिपोर्ट
Modified Date: April 13, 2026 / 12:05 am IST
Published Date: April 12, 2026 5:25 pm IST

सीहोरः IBC24 Special Report: मध्य प्रदेश के सीहोर में नर्मदा नदी में दूध बहाने की खबर ने आज पूरे देश को दो धड़ों में बांट दिया है, जहां एक तरफ आस्था का तर्क है कि ‘नर्मदा मैया‘ को 11 हजार लीटर दूध अर्पित करना अटूट श्रद्धा का हिस्सा है, वहीं दूसरी तरफ वो आंकड़े हैं जो रूह कंपा देते हैं। सवाल उठ रहे हैं उस प्रदेश में, जहां 10 लाख बच्चे आज भी कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं, वहां क्या दूध की एक-एक बूंद किसी मासूम का गला तर नहीं कर सकती थी? क्या आस्था के नाम पर हजारों लीटर संसाधनों को बहा देना जायज है? आस्था और सामाजिक सरोकार के बीच छिड़ी इस बहस ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

IBC24 Special Report: मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा जिसकी एक बूंद को भी आचमन मानकर माथे से लगाया जाता है, लेकिन सीहोर के पातालेश्वर महादेव मंदिर से आई तस्वीरों ने सबको हैरान कर दिया है। यहां एक ‘महाअभिषेक’ के नाम पर 11 हजार लीटर दूध सीधे नदी की धार में बहा दिया गया और दूध के बहाने में बाबा शिवानंद महाराज अगुआ रहे। जैसे-जैसे ये वीडियो सोशल मीडिया पर फैला आस्था के इस तरीके पर सवालों का ‘बवाल’ खड़ा हो गया। विरोध करने वालों का तर्क है कि अगर यही 11,000 लीटर दूध सीहोर या आसपास के आंगनवाड़ियों में बांट दिया जाता तो शायद महादेव ज्यादा प्रसन्न होते। संसाधनों की ये बर्बादी उस वक्त हो रही है, जब हाल ही में पोषण आहार के करोड़ों के घोटाले की खबरें प्रदेश को झकझोर चुकी हैं। हजारों लीटर दूध का यूं बहाना सही या गलत ये तो बहस का विषय है, लेकिन इस दूध से मां नर्मदा के जल और उसमें रहने वाले जीवों को भी नुकसान हो सकता है।

एक ओर मां नर्मदा के जल को प्रदूषित करने का मामला तो दूसरी ओर दूध की बर्बादी पर सवाल, लेकिन इस श्रद्धा के पीछे की जो हकीकत है, वो रूह कंपा देने वाली है। मध्य प्रदेश में आज भी कुपोषण का दानव मासूमों को निगल रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं। 1.36 लाख बच्चे ‘अति गंभीर’ श्रेणी में हैं, जिनकी जान पर हर वक्त खतरा मंडराता है। आधे से ज्यादा महिलाएं एनीमिया की शिकार है। वहीं अब दूध की इस बर्बादी का गणित समझेंगे तो अगर ये 11,000 लीटर दूध बर्बाद न होता, तो एक मानक गिलास 250ml के हिसाब से इससे 44,000 गिलास दूध तैयार होता। 44 हजार बच्चों का एक वक्त का पेट भरता, लेकिन इसे तो आस्था के नाम पर ये पोषण पानी में बहा दिया गया। क्या धर्म का अर्थ सिर्फ अनुष्ठान है? या धर्म का असली अर्थ नर-सेवा ही नारायण सेवा है? सीहोर के इस ‘महाअभिषेक’ ने एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं..श्रद्धा का प्रदर्शन या मानवता का संरक्षण?

इन्हें भी पढ़ेंः-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।