कटनी। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है मध्यप्रदेश की बहोरीबंद विधानसभा सीट की। आज हम यहां के विधायक का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेंगे। बहोरीबंद विधानसभा में पिछले 25 सालो में अगर 6 महीने का समय छोड़ दिया जाय तो ज्यादातर समय कांग्रेस का ही कब्जा रहा है ! इनमे से 20 साल तक कांग्रेस से विधायक रहे निशित पटेल और उनके उनके पिता पूर्व मंत्री श्रवण पटेल का कार्यकाल शामिल है। मंत्री देने के बाद भी बहोरीबंद विधानसभा का जो विकास होना चाहिए वो हुआ नहीं है। पानी की किल्ल्त से लोग इतना जूझ रहे है कि बूंद-बूंद पानी को मोहताज हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य का हाल भी बेहाल है। जाहिर है जिनका हिसाब आने वाले चुनाव में जनता अपने जनप्रतिनिधियों से जरूर मांगेगी।
पहली नजर में बहोरी विधानसभा क्षेत्र में कुछ भी नया नजर नहीं आता। सियासत ने इस इलाके की कितनी उपेक्षा कर रखी है इसका नजारा इस इलाके की सीमा में प्रवेश करते ही हो जाता है। वैसे यहां की अधिकतर आबादी गांवों में निवास करती है और इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए पानी की किल्लत बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकार की ज्यादातर नल–जल योजनाएं बंद पड़ी हैं और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं, जिसे लेकर यहां की जनता में अपने जनप्रतिनिधि को लेकर गुस्सा साफ तौर पर देखा जा सकता है।
ऐसा नहीं है कि आगामी चुनाव में केवल पानी का मुद्दा ही सुनाई देगा। भावांतर योजना को लेकर किसानों की नाराजगी किसी से छिपी नहीं है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। मार्बल की खदानें और तेंदूपत्ता उपार्जन का केंद्र होने के बाद भी बहोरीबंद में बेरोजगारी चरम पर है। बीते कुछ सालों में मार्बल से जुड़े कई उद्योग बंद हुए है। वहीं बीड़ी कारखाने बंद होने का असर भी पड़ा है। युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं।
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चुनावी साल है तो इन समस्याओं को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। कांग्रेस विधायक क्षेत्र में समस्याओं और दुश्वारियों के लिए राज्य सरकार को दोष देते हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस का विधायक होने के नाते बीजेपी सरकार क्षेत्र में बड़ी योजनाओ में अड़ंगा लगा रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस विधायक क्षेत्र में काम करा पाने में नाकाम रहे हैं। साथ ही वो शिवराज सरकार की उपलब्धियों की लंबी लिस्ट गिनाना भी नहीं भूलते।
बहोरीबंद में समस्याओं का अंबार हैं जो चुनाव के नजदीक आते ही सियासी मुद्दों के रूप में गूंजने लगी हैं। ये भी तय है कि मुद्दों के इस शोर में जो अपनी बात जनता के कानों तक पहुंचा पाएगा। उसे ही जनता विधानसभा तक पहुंचाएगी।
बहोरीबंद के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 1962, 1967, 1977, 1990 और 2013 के विधानसभा चुनावों को छोड़ दिया जाएतो बहोरीबंद में ज्यातर कांग्रेस का ही राज रहा है। पिछले उप चुनाव में निशित पटेल ने बीजेपी का दामन थामा था। उसके बाद भी कांग्रेस के सौरभ सिंह ने यहां जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार भी यहां सियासी घमासान दिलचस्प होने वाला है।
बहोरीबंद सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा हो लेकिन बीजेपी पिछले उपचुनाव में मिले हार का बदला लेने के लिए नई रणनीति के साथ मैदान में है। बीजेपी के टिकट दावेदारों की बात करें तो 2014 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए निशित पटेल का दावा सबसे मजबूत नजर आ रहा है। वहीं लोधी समुदाया से आने वाले शंकर महतो भी टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं जबकि कांग्रेस में वर्तमान विधायक सौरभ सिंह का टिकट तय माना जा रहा है।
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बीजेपी के लिए बहोरीबंद सीट को जीतना कभी भी आसान नहीं रहा है, लेकिन 2013 में मोदी लहर के चलते प्रभात पांडेय यहां कांग्रेस से दस साल से विधायक रहे निशित पटेल को हराकर जरूर इसमें कामयाबी हासिल की। लेकिन ज्यादा दिनों तक बहोरीबंद सीट बीजेपी के पास नहीं रही। प्रभात पांडेय के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के सौरभ सिंह ने प्रभात पांडेय के बेटे प्रणय पांडे को शिकस्त देकर सीट दोबारा कांग्रेस के खाते में डाल दी। लेकिन कांग्रेस के पूर्व विधायक निशित पटेल के बीजेपी में शामिल होने के बाद यहां के सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं। निशित पटेल इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे हैं।
बीजेपी हाईकमान के लिए निशित पटेल को टिकट देना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि पार्टी के कई स्थानीय नेता उनके खिलाफ हैं। वैसे निशिट पटेल के सबसे तगड़े दावेदारों में पूर्व विधायक प्रभात पांडेय के बेटे और पिछली बार बीजेपी से चुनाव लडे प्रणय पांडे का नाम शामिल है। उप चुनाव में हारने के बाद प्रणय पांडे क्षेत्र में जमकर पसीना बहा रहे हैं। प्रणय पांडे को उम्मीद है कि इस बार पार्टी के साथ उन्हें जनता का भी समर्थन मिलेगा। वहीं दूसरी सबसे बड़ी लोधी समुदाय से आने वाले शंकर महतो इस बार निशित पटेल और प्रणय पांडे के खिलाफ बाहरी होने के मुद्दे को भुनाने में लगे हैं। शंकर महतो का क्षेत्र में अच्छा दखल है ऐसे में उनकी दावेदारी निशित पटेल और प्रणय पांडे को मुश्किल में डाले हुए हैं।
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बहोरीबंद में बीजेपी में जहां टिकट दावेदारों के बीच घमासान मचा हुआ है। वहीं कांग्रेस में वर्तमान विधायक सौरभ सिंह को फिलहाल कोई चुनौती देने वाला नजर नहीं आता। क्षेत्र में विकास भले ही न हुआ हो पर उनकी स्वच्छ छवि और अच्छे व्यवहार के चलते बहोरीबंद की जनता में उनका विरोध नहीं है। बहोरीबंद में जिस तरह के सियासी समीकरण बन रहे है। इतना तो तय है कि यहां मुद्दों के साथ साथ चुनावी मैनेजमेंट भी नतीजों को काफी प्रभावित करेगा और फिलहाल सभी पार्टी इसी में जुटी हुई हैं।
वेब डेस्क, IBC24