विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने गलत मराठी बोलने के लिए माफी मांगी

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विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने गलत मराठी बोलने के लिए माफी मांगी

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 03:00 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 03:00 PM IST

मुंबई, 24 जून (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को मानसून सत्र के पहले दिन सदन में शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ शब्दों का गलत उच्चारण करने पर खेद व्यक्त किया।

नार्वेकर ने कहा कि यह अनजाने में हुई गलती तकनीकी समस्याओं और संबोधन की अस्पष्ट मुद्रित प्रति के कारण हुई थी तथा उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।

उन्होंने कहा, “सोमवार को शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ तकनीकी त्रुटियों के कारण मुझसे कुछ शब्दों का गलत उच्चारण हो गया। मेरे पास उपलब्ध भाषण की मुद्रित प्रति स्पष्ट नहीं थी। जो कुछ हुआ, वह अनजाने में हुआ।”

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि इस घटना से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्हें इसका खेद है।

नार्वेकर ने कहा, “यदि इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं। मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।”

नार्वेकर ने कहा कि उन्हें मराठी भाषा पर भी उतना ही गर्व है। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कई बार मराठी में भाषण दे चुके हैं और सदस्यों से अनुरोध किया कि वे इसे भी ध्यान में रखें।

यह स्पष्टीकरण उस आलोचना के बीच आया, जिसमें विधानसभा में महान पार्श्व गायिकाओं आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर तथा पूर्व विधायकों के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ मराठी शब्दों के गलत उच्चारण को लेकर सवाल उठाए गए थे।

राज ठाकरे ने मंगलवार को विधानसभा में प्रख्यात गायिका आशा भोसले के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी भाषा का गलत उच्चारण करने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की कड़ी आलोचना की।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने प्रसिद्ध गायक-अभिनेता और आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर का नाम “दीनदयाल मंगेशकर” पढ़ दिया, लेकिन सदन में मौजूद किसी भी विधायक ने इस पर आपत्ति जताने की जरूरत नहीं समझी।

राज ठाकरे ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि यह शोक प्रस्ताव आशा भोसले के लिए नहीं, बल्कि “मराठी भाषा के लिए शोक प्रस्ताव” जैसा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि राहुल नार्वेकर यह प्रस्ताव स्वाहिली या हिब्रू भाषा में भी पढ़ते, तो शायद कोई खास फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी मराठी वैसे भी किसी की समझ में नहीं आ रही थी।

आठ दशकों से अधिक समय तक बॉलीवुड संगीत जगत पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली 92 वर्षीय आशा भोसले का 12 अप्रैल को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया था।

विधानसभा ने पूर्व सदस्यों अनंतराव थोपटे, विठ्ठलराव ढोटे, बलिराम कोटकर-पाटिल, कृष्णराव देशमुख, पाटल्या मावस्कर, वसंतराव सूर्यवंशी, सुरेश कुमार जेठलिया, उषा देवी जगदाले और शकुंतला शर्मा के निधन पर भी शोक व्यक्त किया गया।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत