धीरे-धीरे वापसी की राह पर चल रही हूं : अलका याग्निक

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धीरे-धीरे वापसी की राह पर चल रही हूं : अलका याग्निक

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 04:01 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 04:01 PM IST

मुंबई, 24 जून (भाषा) मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक ने कहा कि वह 2024 में सुनने संबंधी समस्या को लेकर सुर्खियों से दूर रहने के बाद अब धीरे-धीरे इन परेशानियों से उबर रहीं हैं।

वह पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी गई थीं।

‘अगर तुम साथ हो’ और ‘एक दो तीन’ जैसे कई मशहूर गीत गाने वालीं याग्निक को मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। लंबे समय बाद सार्वजनिक रूप से नजर आईं गायिका कमज़ोर लग रही थीं और एक सहायक की मदद से चल रही थीं।

एक दिन बाद, 60 वर्षीय गायिका ने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपने दिल की बात बताई। उन्होंने बताया कि दो साल पहले एक वायरल संक्रमण की वजह से उन्हें ‘सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस’ (कान की नस से जुड़ी सुनने की क्षमता का नुकसान) हो गया था।

यह सुनने से जुड़ी एक समस्या है जो तब होती है जब कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद कोशिकाएं या दिमाग तक आवाज के संकेत पहुंचाने वाली श्रवण तंत्रिका को नुकसान पहुंचता है। इसके लिए आनुवंशिकता, उम्र बढ़ना, अचानक तेज आवाज के संपर्क में आना और वायरल बुखार जिम्मेदार हो सकते हैं।

याग्निक ने लिखा, ‘‘पिछले दो सालों से मैं चर्चा और सार्वजनिक जीवन से दूर रही हूं और अपनी जिंदगी के सफर के बारे में ज्यादा कुछ साझा नहीं किया है। आपमें से कई लोग जानते थे कि मैं सेहत से जुड़ी मुश्किलों का सामना कर रही थी, और इस पूरे समय में आपका प्यार, दुआएं, संदेश और अटूट समर्थन हर कदम पर मेरे साथ रहा है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘आज, जब मैं देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक – प्रतिष्ठित पद्म भूषण – को ग्रहण करने के लिए निकली, तो मेरा मन कृतज्ञता से भरा हुआ था।’’

बॉलीवुड की सबसे सफल पार्श्व गायिकाओं में से एक याज्ञनिक ने कहा कि इस सम्मान से वह बेहद अनुगृहीत महसूस कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भले ही इस पर मेरा नाम हो, लेकिन यह उतना ही उन सभी सुनने वालों का भी है जिन्होंने मेरी आवाज को अपनी जिंदगी में जगह दी, मेरे गानों को पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया और उतार-चढ़ाव व मुश्किलों के समय में मेरा साथ दिया।’’

याग्निक ने कहा, ‘‘यह पल खास तौर पर मायने रखता है क्योंकि यह न सिर्फ मेरे काम को मिली पहचान का प्रतीक है, बल्कि उस ताकत की याद भी दिलाता है जो प्यार, उम्मीद और मुश्किलों से उबरने की क्षमता से मिलती है… मैं धीरे-धीरे वापसी कर रही हूं।’’

उन्होंने इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह वहां सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए मौजूद रहना चाहती थीं जो उनकी यात्रा का हिस्सा रहे हैं।

याग्निक ने लिखा, ‘‘इतने सालों तक आपके स्नेह, दया, प्रार्थनाओं और मुझ पर भरोसे के लिए आपका धन्यवाद। मैं इन सभी को अपने साथ संजोकर रखती हूं। आज, मैंने सिर्फ एक सम्मान ही स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन लाखों लोगों का प्यार भी महसूस किया जो मेरी इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं।’’

भाषा धीरज वैभव

वैभव