मुंबई, 29 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मीडिया संगठनों और ऑनलाइन मंचों को बांद्रा स्थित ‘आशीर्वाद’ बंगले को ‘‘शापित’’, ‘‘भूतिया’’ या ‘‘मनहूस’’ बताने से रोक दिया है। यह बंगला एक समय दिवंगत बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना के स्वामित्व में था।
न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 24 जुलाई को पारित एक अंतरिम आदेश में कहा कि इस तरह के वर्णन प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं और याचिकाकर्ता के शांतिपूर्ण एवं सम्मान के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
कुछ साल पहले इस प्रतिष्ठित बंगले को खरीदने वाले कारोबारी शशि शेट्टी ने अदालत का रुख किया था। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर कई लेख, पोस्ट और वीडियो मिले, जिनमें इस संपत्ति को “भूतिया”, “शापित” और “अपशकुनी” बताया गया था।
शेट्टी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि मूल बंगले को गिराकर नया मकान बनाया गया है, लेकिन उसका नाम नहीं बदला गया है। वकील ने कहा कि नया मकान भी ‘आशीर्वाद’ नाम से ही जाना जाता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वेबसाइट इंडियाडॉटकॉम ने हाल में ‘19 रियल हॉन्टेड हाउसेस इन इंडिया दैट विल गिव यू ए कोल्ड स्वीट’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें आशीर्वाद बंगले को भी शामिल किया गया था।
न्यायाधीश ने कहा कि मालिक द्वारा अंतरिम राहत का अनुरोध करना “पूरी तरह उचित” है। अदालत ने अपने आदेश में कहा, “मेरे प्रथम दृष्टया विचार में यह सामग्री स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता का मानहानि करती है और यह संकेत देती है कि वह एक भूतिया और कथित रूप से शापित बंगले में रहते हैं।”
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह शेट्टी के “शांतिपूर्ण और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार” को भी प्रभावित करती है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी प्रतिवादी ने अदालत में पेश होकर अपनी प्रकाशित सामग्री का बचाव या औचित्य साबित नहीं किया।
अदालत ने कहा, “मेरे प्रथम दृष्टया विचार में ऐसी सामग्री पूरी तरह अनुचित है और यह केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई प्रतीत होती है, जिससे याचिकाकर्ता को नुकसान हो रहा है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।”
अदालत द्वारा दी गई अंतरिम राहत अगली सुनवाई 21 अगस्त, 2026 तक जारी रहेगी।
भाषा अमित सुरेश
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