मुंबई, 14 अक्टूबर (भाषा) साइबर ठगों द्वारा नासिक के दो बुजुर्गों को अलग-अलग घटनाओं में प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की अदालत में ऑनलाइन पेशी कराने की धमकी देकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने और कुल 6.72 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। पुलिस ने यह जानकारी दी।
एक अधिकारी ने बताया कि नासिक साइबर पुलिस ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की और सितंबर में हुई इन घटनाओं की जांच शुरू की।
पुलिस ने बताया कि पीड़ितों में गंगापुर रोड निवासी 74 वर्षीय अनिल लालसरे भी शामिल हैं, जो उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। लालसारे की पत्नी ‘स्ट्रोक’ के बाद पिछले ढाई साल से बिस्तर पर हैं। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है और दंपति का बेटा विदेश में रहता है।
प्राथमिकी के मुताबिक, ‘‘लालसरे को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया है। उसने लालसरे से कहा कि अगर वह 72 लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जाएगा और प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति गवई की अदालत में पेश किया जाएगा।’’
इसके मुताबिक फोन करने वाले ने शिकायतकर्ता को धमकी भी दी कि यदि वह पैसे नहीं देंगे तो ‘सीबीआई’ उन्हें गिरफ्तार करेगी और उनसे दिल्ली में पूछताछ की जाएगी।
पुलिस ने बताया, ‘‘उम्र संबंधी बीमारी के कारण ठीक से चलने में असमर्थ लालसरे ने बैंक जाकर दिए गए खाते में 72 लाख रुपये जमा कर दिए।’’
उसने बताया कि धोखाधड़ी का खुलासा 13 अक्टूबर को तब हुआ जब लालसरे के रिश्तेदार वृद्ध दंपति से मिलने उनके घर पहुंचे।
पुलिस ने बताया कि इसी तरह की एक और घटना सामने आई है जिसमें एक बुजुर्ग से साइबर ठगों ने इसी तरह की धमकी देकर ठगी की।
प्राथमिकी के मुताबिक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर सीजेआई की अदालत में पेश करने की धमकी दी गई और आरोप लगाया कि उनके सिम कार्ड का इस्तेमाल अश्लील तस्वीरें और वीडियो प्रसारित करने के लिए किया गया है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचने के लिए बुजुर्ग ने कुल छह करोड़ रुपये का भुगतान किया।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश