अमरावती, एक अप्रैल (भाषा) युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) प्रमुख वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की आलोचना करते हुए अमरावती पर हाल में पारित विधानसभा प्रस्ताव को ‘बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार’ को छिपाने का एक नाटक बताया।
रेड्डी की यह टिप्पणी आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा हाल में एक प्रस्ताव पारित करने के बाद आयी है, जिसमें केंद्र से अमरावती को दक्षिणी राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा देने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने ताडेपल्ली स्थित वाईएसआरसीपी केंद्रीय कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “धन सृजन और दूरदर्शिता के बहाने वह (नायडू) कई नामों का इस्तेमाल करते हैं और नाटक करते हैं… वे नये नाम देते हैं और विषयों को भटकाते हैं…पिछले सप्ताह विधानसभा में पारित प्रस्ताव (अमरावती पर) इसी नाटक का नवीनतम अध्याय है।”
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी ने दलील दी कि संविधान में राज्य की राजधानी का कोई प्रावधान नहीं है, राजधानी केवल पूरे देश के लिए होती है, जबकि राज्यों के अपने शासन केंद्र होते हैं।
उन्होंने कहा, “राज्यों की राजधानी का कोई प्रावधान नहीं है। यह केवल देश के लिए है। राज्यों के अपने शासन केंद्र होते हैं। यह बात किसी को नहीं भूलनी चाहिए।”
रेड्डी के अनुसार, केंद्र ने पहले ही यह स्वीकार कर लिया है कि राजधानी का चुनाव करना राज्य की इच्छा है और उसने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जवाबी हलफनामा भी दाखिल किया है।
वर्ष 2001 में तीन नए राज्यों – झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ – के गठन का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनकी राजधानियों के निर्धारण में केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाया।
रेड्डी ने सवाल किया, “उन्हें राजधानियां कैसे मिलीं? क्या केंद्र ने फैसला किया? उन राज्यों ने फैसला किया। तो यह हम (आंध्र प्रदेश) पर क्यों लागू होता है, जबकि यह किसी पर लागू नहीं हुआ? यह सब नाटक क्यों?”
नायडू पर अपनी सरकार के कथित भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा प्रस्ताव की कोई आवश्यकता नहीं थी।
उन्होंने कहा कि नायडू का नेतृत्व राज्य के लिए “दुर्भाग्य” है।
अमरावती पर प्रस्ताव पारित करने के लिए विधान परिषद की बैठक क्यों नहीं बुलाई गई, यह सवाल करते हुए विपक्षी दल के नेता ने कहा कि इससे नायडू के कथित भ्रष्टाचार उजागर होता है।
नायडू के इस दावे को खारिज करते हुए कि राजधानी कानून अब अपरिवर्तनीय है, उन्होंने दावा किया कि विधायी निकायों के पास कानून बनाने और उनमें संशोधन करने का अधिकार है, जिसमें संविधान भी शामिल है।
अपनी पिछली ‘तीन राजधानियों’ की नीति का बचाव करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य के किसी भी क्षेत्र के कभी खिलाफ नहीं थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी भी अमरावती से राजधानी का दर्जा नहीं छीना और 2019 से 2024 के बीच पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान राजधानी के त्रिविभाजन योजना के तहत इसे विधायी राजधानी के रूप में बरकरार रखा।’
इस बीच, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी।
भाषा अमित रंजन
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