महाराष्ट्र सरकार को दो दिन में मराठा-ओबीसी आरक्षण मुद्दा सुलझाना चाहिए : राकांपा(शप)

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महाराष्ट्र सरकार को दो दिन में मराठा-ओबीसी आरक्षण मुद्दा सुलझाना चाहिए : राकांपा(शप)

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 06:44 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 06:44 PM IST

मुंबई, आठ सितंबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार को आने वाले त्योहारों से पहले सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए मराठा-ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को दो दिनों के भीतर सुलझाना चाहिए।

राकांपा(शप) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ‘आपसी खींचतान’ के कारण मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे से किए गए वादों को पूरा करने में देरी हो रही है जो इस समय अनशन पर हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मराठा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक बुला रहे हैं और देखना होगा कि इसका क्या नतीजा निकलता है।

शिंदे ने कहा,‘‘लेकिन त्योहारों के मौसम से पहले सामाजिक तनाव का बढ़ना ठीक नहीं है। सरकार को दो दिनों के भीतर इसका समाधान निकालना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने चुनावी लाभ के लिए चुनाव के दौरान वादे किए थे और अब सरकार को उन वादों का जवाब देना चाहिए।

शिंदे ने कहा, ‘‘प्रत्येक समुदाय को लगता है कि उसके साथ अन्याय हो रहा है। अब यह सरकार के लिए एक परीक्षा है।’’

राकांपा (शप) नेता ने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को लेकर सरकार के भीतर ही ‘आपसी खींचतान’ चल रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सत्तारूढ़ पक्ष में मतभेदों के कारण ही सरकार के आश्वासनों पर अमल नहीं हो रहा है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर शिंदे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों का यह कर्तव्य है कि वे परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रहे युवाओं का समर्थन करें।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व में ऐसी घटनाओं की वजह से मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है। अगर इतनी संख्या में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगने के बावजूद कोई इस्तीफा नहीं देता, तो सरकार को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।’’

शिंदे ने यह भी कहा कि अगले हफ्ते शुरू होने वाले गणेश उत्सव से पहले सरकार को ध्वनि प्रसारकों के इस्तेमाल पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस को त्योहारों के दौरान अश्लील नृत्य जैसी आपत्तिजनक गतिविधियों के खिलाफ दिशानिर्देश बनाने चाहिए।

भाषा धीरज माधव

माधव