मुंबई, 14 फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राकांपा (शप) के नेताओं ने दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया के साथ-साथ अजित पवार पर लिखे गये एक लेख को लेकर एक-दूसरे पर शनिवार को निशाना साधा।
अजित पवार की 28 जनवरी को एक विमान हादसे में मृत्यु हो गई थी।
राकांपा नेता आनंद परांजपे ने जहां एक ओर लेख के लिए माफी की मांग करते हुए दावा किया कि इसमें पवार की मृत्यु के बाद भी उन्हें बदनाम किया गया है, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की राज्य इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने विलय के मुद्दे को बंद कर दिया है।
शशिकांत शिंदे ने पार्टी के मुखपत्र ‘राष्ट्रवादी’ में यह लेख लिखा था।
शिंदे ने पत्रकारों को बताया कि विलय पर अंतिम निर्णय स्थानीय निकाय चुनावों के बाद लिया जाना था और इसका ढांचा चर्चाओं के माध्यम से तय किया जाना था।
उन्होंने कहा कि अजित पवार की मृत्यु के बाद अब दोनों पार्टियों के संभावित विलय पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है।
शिंदे ने कहा, ‘‘राकांपा (शप) द्वारा इस मुद्दे को बंद कर दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही थी कि उनका गुट आक्रामक रूप से विलय के लिए दबाव डाल रहा है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अब खुद को फिर से संगठित करने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।
अपने लेख का हवाला देते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने यह दावा नहीं किया था कि अजित पवार ने गलती की है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने केवल इतना कहा था कि वह पार्टी में व्याप्त विभाजन को दूर करना चाहते थे।’’
इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने शिंदे के लेख की निंदा की और उनसे माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने कहा कि लेख में अजित पवार द्वारा अविभाजित राकांपा को छोड़ने की परिस्थितियों के बारे में ‘‘झूठे और भ्रामक’’ दावे किए गये हैं।
परांजपे ने कहा, ‘‘उनके निधन के बाद भी उनकी छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके परिवार से माफी मांगी जानी चाहिए। पार्टी कार्यकर्ता इन आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देंगे।’’
राकांपा (शप) की पत्रिका ‘राष्ट्रवादी’ के फरवरी 2026 अंक में प्रकाशित एक लेख में, शिंदे ने दावा किया था कि ‘‘अदृश्य शक्तियों की चालों, धमकियों और झूठे आरोपों के जाल’’ ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी जिसने अजित पवार को मूल संगठन से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया और इससे शरद पवार द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन हो गया।
अजित पवार द्वारा ‘‘षड्यंत्र या दबाव’’ के कारण पार्टी छोड़ने के दावों को खारिज करते हुए, परांजपे ने कहा कि उन्होंने वर्षों से आंतरिक चर्चाओं के दौरान लगातार भाजपा के साथ गठबंधन की वकालत की थी।
परांजपे ने अजित पवार की मृत्यु के तुरंत बाद राकांपा (शप) द्वारा शुरू की गई विलय वार्ता के समय की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक रूप से असंवेदनशील बताया।
उन्होंने दोहराया कि पार्टी के नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि विलय का मुद्दा फिलहाल पार्टी के एजेंडे में नहीं है।
राकांपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री छगन भुजबल ने आश्चर्य व्यक्त किया कि हर रोज विलय पर चर्चा करने की क्या आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘सुनेत्रा पवार अब उपमुख्यमंत्री हैं और जल्द ही राकांपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी। वह इस मामले पर चर्चा करेंगी और फैसला लेंगी।’’
भुजबल ने विलय वार्ता से जुड़ी अटकलों की कड़ी आलोचना की।
भुजबल ने सवाल किया, ‘‘सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर जल्दबाजी को लेकर आलोचना हुई थी। विलय की बात को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों है?’’
भाषा
देवेंद्र धीरज
धीरज