राकांपा (शप) को राजग, सत्तारूढ़ राकांपा या कांग्रेस से कोई प्रस्ताव नहीं मिला: सुले

राकांपा (शप) को राजग, सत्तारूढ़ राकांपा या कांग्रेस से कोई प्रस्ताव नहीं मिला: सुले

राकांपा (शप) को राजग, सत्तारूढ़ राकांपा या कांग्रेस से कोई प्रस्ताव नहीं मिला: सुले
Modified Date: July 18, 2026 / 10:03 pm IST
Published Date: July 18, 2026 10:03 pm IST

मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को अपनी पार्टी के राजग में शामिल होने या सत्तारूढ़ राकांपा के साथ विलय की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि न तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), न ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के किसी सहयोगी दल और न ही कांग्रेस ने शरद पवार नीत पार्टी से ऐसे किसी प्रस्ताव के लिए संपर्क किया है।

यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि विलय या पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की खबरें पूरी तरह से निराधार हैं, क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल ने इस तरह के कदम के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है।

बारामती से लोकसभा सांसद सुले ने कहा, ‘किसी की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं आया है। न तो शरद पवार, जयंत पाटिल, अनिल देशमुख, राजेश टोपे और न ही हमारी पार्टी के किसी अन्य वरिष्ठ नेता को ऐसा कोई प्रस्ताव मिला है।’

उन्होंने कहा, ‘न तो भाजपा, न कांग्रेस और न ही राजग के किसी सहयोगी दल ने हमसे संपर्क किया है। जब कोई प्रस्ताव ही नहीं है, तो विलय या किसी गठबंधन में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।’

पार्टी के सांसदों और विधायकों पर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने का दबाव होने की खबरों को खारिज करते हुए सुले ने कहा कि राकांपा (शप) के सभी आठ सांसद मजबूती से पार्टी प्रमुख शरद पवार के साथ खड़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम नियमित रूप से मिलते हैं। हमारे किसी भी सांसद या विधायक ने मुझसे यह नहीं कहा कि वे कोई अलग राजनीतिक रुख अपनाना चाहते हैं। हर कोई जहां है, खुश है।’

जंतर मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा शनिवार को जबरन अस्पताल में भर्ती कराए जाने को सुले ने ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘असंवैधानिक’ करार दिया।

सुले ने कहा, ‘अगर कोई नागरिक लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है, तो सरकार को उसे जबरन अस्पताल में स्थानांतरित करने के बजाय उससे बात करनी चाहिए। ऐसी कार्रवाई लोकतंत्र के लिए हानिकारक है और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।’

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश


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